
नई दिल्ली:भारतीय मीडिया और मनोरंजन (M&E) सेक्टर इन दिनों एक बड़े नीतिगत और व्यावसायिक द्वंद्व से गुजर रहा है। एक तरफ जहाँ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने रिलायंस जियो (JIO) के खिलाफ बाजार में अपनी प्रभावी स्थिति (Dominant Position) के कथित दुरुपयोग की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए दस्तावेजों की माँग की है,
वहीं दूसरी तरफ ओपन आर्किटेक्चर के तहत स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर लीनियर टीवी चैनलों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मुख्य बिंदु:
जियो के खिलाफ शिकायत और मंत्रालय का रुख
* शिकायत: डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर फेडरेशन (DSPF) ने 31 जुलाई 2026 को मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराई थी कि जियो (RIL) ब्रॉडकास्टिंग, डिस्ट्रीब्यूशन, एमएओ और रिटेल जैसे कई स्तरों पर एक साथ काम करते हुए अपनी स्थिति का फायदा उठा रही है। इससे ग्राहकों और छोटे Last Mile Cable Operators (LCOs) के कारोबार को नुकसान पहुँच रहा है।
* मंत्रालय की कार्रवाई: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अंडर सचिव शक्ति सिंह के हस्ताक्षर से जारी पत्र में स्पष्ट किया है कि DSPF अपने आरोपों के समर्थन में पुख्ता दस्तावेज और सबूत उपलब्ध कराए, ताकि मामले की विस्तृत जाँच की जा सके।
* स्थिति स्पष्ट: यह पत्र किसी भी प्रकार का अंतिम निर्णय या जियो को दोषी ठहराने का आदेश नहीं है, बल्कि यह केवल तथ्यात्मक जाँच की प्रक्रिया की शुरुआत है।स्ट्रीमिंग सेवाओं और लीनियर चैनलों को लेकर नया विवादविवाद का दूसरा और अधिक तकनीकी पहलू एएलटीडी (ALTD) और ब्रॉडकास्टर्स की कार्यप्रणाली से जुड़ा है, जो वर्तमान में ट्राई (TRAI) के परामर्श पत्र के दायरे में है:
* नियमों का उल्लंघन: रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ व्यावसायिक घराने ब्रॉडकास्टर्स के साथ मिलकर लीनियर टीवी चैनलों (चाहे वे फ्री-टू-एयर हों या पे-चैनल) को बिना किसी सर्विस प्रोवाइडर की बाध्यता के सीधे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध करा रहे हैं।
* कानूनी पेचीदगियां: मौजूदा नियमों के तहत, जवाबदेही तय करने के लिए लीनियर चैनलों की डिलीवरी कैस (CAS) और एसएमएस (SMS) से लैस एड्रेसेबल सिस्टम के माध्यम से ही होनी अनिवार्य है।केबल टीवी और डीटीएच इंडस्ट्री के अस्तित्व पर सवालकेबल और डीटीएच (DTH) ऑपरेटरों का मानना है कि यदि चैनलों को इस तरह ओपन आर्किटेक्चर में बिना मूल्य प्रतिबंध (Price Restriction) के परोसा जाने लगा, तो डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (DAS) और ट्राई के टैरिफ ऑर्डर का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।यह प्रवृत्ति केबल टीवी इंडस्ट्री के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है, जो वर्षों से इस सेक्टर की रीढ़ रही है।
आगे की रणनीतिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए इंडस्ट्री से जुड़े सभी संगठनों को इस पर पैनी नजर रखने की सलाह दी गई है। जानकारों का सुझाव है कि इस अवैध संचालन के खिलाफ प्राधिकरण को विश्वास में लेते हुए एमएओ (MSOs) के साथ समन्वय स्थापित कर एक ठोस और संयुक्त रणनीति बनाई जानी चाहिए।
