जिले की 56 हैचरी से 200 करोड़ मछली बीज की सप्लाई, 2025-26 में 3846 लोगों को मिला रोजगार
मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना से संवर रहा मत्स्य पालकों का जीवन, नई तकनीकों व सब्सिडी से बढ़ रहा कारोबार

रामपुर, 3 मई। मुरादाबाद मंडल का रामपुर जिला अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन और बीज उत्पादन के क्षेत्र में पूरे उत्तर भारत का सिरमौर बन गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में मछली उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले 27 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे कुल उत्पादन 10,402 मीट्रिक टन के पार पहुंच गया है। उत्पादन बढ़ने के साथ ही रोजगार सृजन के मोर्चे पर भी इस क्षेत्र ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक प्रशांत गंगवार के अनुसार, वर्ष 2025-26 में मत्स्य पालन और बीज उत्पादन से सीधे तौर पर 3846 लोगों को रोजगार मुहैया कराया गया है। जिले में वर्तमान में 56 हैचरी संचालित हैं, जहां से करीब 200 करोड़ मछली बीज पूरे उत्तर भारत में सप्लाई किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिल रही सब्सिडी और नई तकनीकों के इस्तेमाल ने रामपुर को मछली बीज उत्पादन में ‘मिनी कोलकाता’ की पहचान दिला दी है। यहां की पंगेसियस मछली और बीजों की मांग दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब तक छाई हुई है।
फौजी फिश हैचरी से सैकड़ों को मिला रोजगार
तहसील मिलक के ग्राम धनौरा निवासी सत्येन्द्र कुमार की ‘फौजी फिश हैचरी’ मत्स्य पालन क्षेत्र में एक मिसाल बनकर उभरी है। वर्ष 2002 से संचालित इस हैचरी में रोहू, नैन, ग्रास, सिल्वर और कतला जैसी मछलियों का उत्तम बीज तैयार किया जाता है। सरकारी योजना के तहत सत्येन्द्र को पानी में ऑक्सीजन बनाए रखने वाले एरेटर मशीन पर 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिली है, जिससे उनके कारोबार को और गति मिली है। 70 से 80 लाख रुपये के सालाना टर्नओवर वाली यह हैचरी स्थानीय स्तर पर 100 से 150 लोगों को सीधा रोजगार मुहैया करा रही है। कारोबार को और अधिक लाभकारी बनाने के लिए वे भविष्य में मछली बीजों के लिए एक तय न्यूनतम मूल्य निर्धारित होने की उम्मीद जता रहे हैं। उनका मानना है कि यदि बिजली आपूर्ति को 10 घंटे से बढ़ाकर 18-20 घंटे कर दिया जाए और सोलर पैनल की सुविधा मिले, तो डीजल का खर्च बचेगा और मत्स्य पालकों के मुनाफे में कई गुना वृद्धि होगी।
सहकारी समितियों से बाजार तक पहुंच हुई आसान
मत्स्य पालन को बढ़ावा देने में सहकारी समितियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं। तहसील शाहाबाद के ग्राम कीरा निवासी और मत्स्य जीवी सहकारी समिति लिमिटेड के सचिव राजेंद्र प्रसाद अपने गांव के 264 हेक्टेयर के सामुदायिक तालाब और 7 बीघा निजी तालाब में बड़े स्तर पर मत्स्य पालन कर रहे हैं। वर्ष 2021 से पंजीकृत उनकी यह समिति स्थानीय बाजारों से लेकर आसपास के राज्यों तक ताजी मछलियों की आपूर्ति कर रही है, जिससे 10 से 15 लाख रुपये का सालाना टर्नओवर हो रहा है। राजेंद्र प्रसाद का सुझाव है कि नीलामी के बाद पट्टा आवंटन का अधिकार पत्र यदि एक सप्ताह के भीतर मिल जाए, तो मत्स्य पालक सही मौसम में बीज डालकर बेहतर उत्पादन ले सकते हैं। साथ ही, मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा देकर उसी दर पर बिजली मुहैया कराई जाए और बोरिंग की सुविधा मिले, तो लागत में भारी कमी आएगी और किसानों की आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ होगी।
पट्टा आवंटन की पारदर्शी प्रक्रिया और सब्सिडी का लाभ
सहायक निदेशक (मत्स्य) प्रशांत गंगवार ने बताया कि मत्स्य पालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना वरदान साबित हो रही है। इस योजना के तहत ग्राम समाज के तालाबों के पट्टाधारकों को मछली के बीज और चारे के लिए एक लाख 60 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की सब्सिडी दी जा रही है। रामपुर जिले में अब तक 419 हेक्टेयर तालाब पट्टे पर दिए जा चुके हैं। उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होने वाले इस आवंटन में पूरी पारदर्शिता बरती जाती है, जिसमें कश्यप समाज, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग को वरीयता के आधार पर प्राथमिकता दी जा रही है। इन पारदर्शी नीतियों और योजनाओं का ही नतीजा है कि 2025-26 के दौरान 3846 लोगों को इस क्षेत्र से जुड़कर अपनी आजीविका चलाने का सीधा अवसर मिला है।
आधुनिक तकनीकों से उत्पादन को मिल रही नई दिशा
पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ जिले के किसान प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत ‘बायोफ्लॉक’ और ‘आरएएस’ जैसी आधुनिक तकनीकों को भी अपना रहे हैं। आरएएस तकनीक से पानी को रिसाइकिल करके सीमित स्थान में अधिक उत्पादन लिया जा रहा है। वर्तमान में रामपुर में चार बायोफ्लॉक और एक आरएएस यूनिट सफलतापूर्वक चल रही है। इसके अलावा निषादराज बोट सब्सिडी योजना के तहत नाव खरीदने पर 40 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है। भविष्य में मूल्य संवर्धन के लिए कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना से रामपुर के मत्स्य उद्योग को एक नई ऊंचाई मिलेगी।
