| आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, छात्र आंदोलन की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की उठाई मांग |

मुरादाबाद। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर देश की परीक्षा एवं भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की। ज्ञापन में हालिया छात्र आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने तथा युवाओं के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की गई।ज्ञापन में कहा गया कि देश का युवा शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता, प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंता में है। हालिया घटनाओं और छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई ने भी कई सवाल खड़े किए हैं।
पार्टी ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की आवाज को सम्मानपूर्वक सुने जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।पार्टी ने अपनी प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने, आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने, संसद में पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई पर विस्तृत चर्चा कराने तथा आंदोलन में शामिल छात्रों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई न करने की मांग उठाई। इसके साथ ही शिक्षा माफियाओं और पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ कठोर एवं समयबद्ध कार्रवाई की भी मांग की गई।ज्ञापन में छात्राओं के साथ हुई कथित अभद्र घटनाओं की निष्पक्ष जांच, दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई, प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग की जांच तथा भविष्य में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को बॉडी कैमरा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने की भी मांग की गई।
इसके अतिरिक्त पार्टी ने NEET UG, JEE Main सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सुरक्षित एवं पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू करने, सभी सरकारी भर्तियों के परीक्षा कैलेंडर को समयबद्ध बनाने, पेपर लीक और भर्ती घोटालों में शामिल दोषियों को कड़ी सजा देने, भर्ती प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने, सभी परीक्षाओं में सामान्यीकरण (Normalization) प्रणाली समाप्त करने तथा परिणाम के साथ अभ्यर्थियों का प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने की मांग रखी।
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि शिक्षा, रोजगार और न्याय प्रत्येक युवा का संवैधानिक अधिकार है तथा यदि इन मांगों पर समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई की जाती है तो इससे देश के युवाओं का लोकतांत्रिक व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और भर्ती प्रक्रिया पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
