

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश में अवैध कब्जों के खिलाफ जारी ‘योगीराज’ के कड़े अभियान के तहत आज स्थानीय नगर निगम की टीम कपूर कंपनी अग्निशमन कार्यालय के पास भारी पुलिस बल और बुल्डोजर लेकर पहुंची। जैसे ही टीम ने अवैध निर्माण को ढहाने की कार्रवाई शुरू की, वहां मौजूद स्थानीय महिलाओं ने टीम का घेराव कर भारी हंगामा शुरू कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
कपूर कंपनी अग्निशमन कार्यालय के पास स्थित इस बेशकीमती जमीन पर लंबे समय से विवाद चल रहा था। बस्ती के लोगों का आरोप है कि यहाँ करीब 100 साल पुराने ऐतिहासिक कुएं मौजूद थे, जिन्हें कुछ मुस्लिम परिवारों द्वारा जानबूझकर पाट दिया गया और उस पर अवैध निर्माण खड़ा कर लिया गया। सूत्रों की मानें तो इस करोड़ों रुपये की सरकारी और सार्वजनिक जमीन को ‘वक्फ संपत्ति’ बताकर हड़पने का प्रयास किया जा रहा था।
बस्ती वालों का दावा: “100 साल पुराना है कुओं का इतिहास
“स्थानीय बुजुर्गों और बस्ती के निवासियों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि ये कुएं इस क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर और जल स्रोत थे।”इन कुओं का इतिहास दशकों पुराना है। साज़िश के तहत इन्हें पाटकर करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। प्रशासन को इस पर सख्त कार्रवाई करनी ही चाहिए।” – स्थानीय निवासी
प्रश्न: परिसर में कहाँ से आए कुएं और क्या है इनका इतिहास?
इस कार्रवाई के बाद अब यह मामला और गरमा गया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस सरकारी परिसर में इन कुओं का कोई वास्तविक और प्रमाणित राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) मौजूद है? पुरातन समय में ये कुएं जनहित के लिए बनाए गए थे या किसी निजी संपत्ति का हिस्सा थे, इसे लेकर अब जांच की मांग तेज हो गई है।
प्रशासनिक रुख: कब होगी इसकी निष्पक्ष जांच?
हंगामे को देखते हुए मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही, लेकिन नगर निगम और पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि किसी भी कीमत पर अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।स्थानीय प्रशासन अब इस पूरी जमीन के मालिकाना हक, वक्फ के दावों की सत्यता और कुओं के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की जांच कराने की तैयारी में है। देखना यह होगा कि इस करोड़ों की जमीन का असली सच कब तक सामने आता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
