• Sun. May 24th, 2026

Moradabad Prahari

News Paper

प्रधान पति’ की तर्ज पर महमूदपुर माफी में ‘देवर जी राज’? बैनरों से अध्यक्ष का नाम गायब, देवर संभाल रहे कमान; जांच होने पर बड़े गबन की आशंका

ByMoradabadprahari

May 24, 2026

विशेष रिपोर्ट: जनता के बीच सुगबुगाहट तेज, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

मुरादाबाद।जनपद की नगर पंचायत महमूदपुर माफी इन दिनों स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। क्षेत्र में इस बात को लेकर सुगबुगाहट बेहद तेज है कि नगर पंचायत की चुनी हुई अध्यक्ष बबीता देवी की जगह, उनके देवर मंगल सैनी ‘प्रतिनिधि’ बनकर पूरे बोर्ड और व्यवस्था का संचालन कर रहे हैं। स्थानीय जनता अब खुलकर इस ‘परदे के पीछे के खेल’ पर सवाल उठाने लगी है।

बैठकों से लेकर होर्डिंग्स तक… सिर्फ देवर का जलवा

​स्थानीय नागरिकों से मिल रही जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत के अधिकांश सरकारी कार्यों, प्रशासनिक बैठकों और सार्वजनिक मंचों पर अध्यक्ष बबीता देवी की उपस्थिति न के बराबर रहती है। उनकी जगह उनके जेठ मंगल सैनी ही मुख्य रूप से सक्रिय दिखाई देते हैं।

​हैरानी की बात तो यह है कि क्षेत्र में विकास कार्यों या शुभकामनाओं के लिए लगाए गए सरकारी व अर्ध-सरकारी बैनरों और होर्डिंग्स से भी महिला अध्यक्ष का नाम गायब है। इन होर्डिंग्स में मंगल सैनी की तस्वीरें प्रमुखता से लगाई गई हैं, जिससे आम जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि नगर पंचायत की वास्तविक कमान किसके हाथ में है।

विकास कार्यों की जानकारी से अनभिज्ञ हैं अध्यक्ष!

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि नगर पंचायत में क्या विकास कार्य हो रहे हैं, बजट कहाँ खर्च हो रहा है, इसकी जमीनी जानकारी खुद अध्यक्ष बबीता देवी को भी शायद पूरी तरह नहीं हो। नीतिगत फैसलों से लेकर वित्तीय प्रस्तावों तक, सभी निर्णय कथित रूप से उनके देवर द्वारा ही लिए जा रहे हैं।

क्या कहते हैं स्थानीय नागरिक:”हमने अपनी अध्यक्ष को सार्वजनिक कार्यक्रमों या आम जनता के बीच बहुत कम देखा है। जब सारे फैसले और बैठकों का संचालन प्रतिनिधि के रूप में उनके देवर को ही करना है, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के मत का क्या महत्व रह जाता है?”

निष्पक्ष जांच हुई तो खुल सकते हैं भ्रष्टाचार के पन्ने

इस पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आ रहा है। सूत्रों का दावा है कि नगर पंचायत महमूदपुर माफी में विकास कार्यों और सरकारी फंड के खर्चों में भारी घालमेल चल रहा है। यदि उच्च अधिकारियों द्वारा इस नगर पंचायत के खर्चों और फाइलों की निष्पक्ष व गहन जांच कराई जाए, तो वित्तीय अनियमितताओं और लाखों रुपये के गबन का बड़ा मामला उजागर हो सकता है।हालांकि, इन प्रशासनिक और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस पर किसी बड़े अधिकारी का बयान आया है। लेकिन क्षेत्र में बढ़ती इस चर्चा ने स्थानीय प्रशासन और विपक्षी खेमे को जरूर सतर्क कर दिया है। अब देखना यह होगा कि इस मामले पर खुद अध्यक्ष बबीता देवी या जिला प्रशासन की ओर से क्या सफाई सामने आती है।


गुगल से प्राप्त जानकारीक के अनुसार , नगर पंचायत या नगरपालिका का अध्यक्ष (चेयरमैन) अपने स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को आधिकारिक प्रतिनिधि (Representative) नियुक्त नहीं कर सकता है।
अध्यक्ष एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि होता है और उसे राज्य के नगर पालिका अधिनियम के तहत कानूनी रूप से कार्य करने का अधिकार प्राप्त होता है।


कानूनी प्रावधान: अध्यक्ष के प्रशासनिक अधिकार, कर्तव्य और शक्तियां सीधे तौर पर उस राज्य के ‘नगर पालिका अधिनियम’ (जैसे उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916) से नियंत्रित होते हैं। इन अधिनियमों में किसी भी गैर-निर्वाचित व्यक्ति को अध्यक्ष के रूप में कार्य करने या हस्ताक्षर करने का अधिकार देने का कोई प्रावधान नहीं है।


अधिकारिक कार्य: परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करना, विकास कार्यों के प्रस्ताव पास करना और वित्तीय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने जैसे आधिकारिक कार्य केवल निर्वाचित अध्यक्ष द्वारा ही किए जा सकते हैं।
वैकल्पिक व्यवस्था (उपाध्यक्ष): अध्यक्ष की अनुपस्थिति (बीमारी या विदेश यात्रा) में, अधिनियम के अंतर्गत निर्वाचित उपाध्यक्ष (Vice-Chairman) ही अध्यक्ष की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकता है।
यदि कोई अध्यक्ष अपने स्थान पर किसी रिश्तेदार या अन्य व्यक्ति को प्रतिनिधि के तौर पर सरकारी कामकाज करने के लिए अनधिकृत रूप से बिठाता है या काम करवाता है, तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाता है और कानूनी रूप से आपत्तिजनक है। ( यह समस्त जानकारी गुगल से प्राप्त की गई है)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *