योजना के तहत अब तक कुल 52,981 आवेदन हुए प्राप्त, शिक्षा और लिंगानुपात में दिख रहा सकारात्मक असर

मुरादाबाद, मार्च 2026 की सीएम डैशबोर्ड रैंकिंग में बजा डंका: कन्या सुमंगला और निराश्रित महिला पेंशन योजना में सम्भल पूरे प्रदेश में प्रथम*संभल, 15 अप्रैल। जिले में ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ बेटियों के भविष्य को संवारने और उन्हें सशक्त बनाने में एक मजबूत ढाल साबित हो रही है। योजना के प्रति बढ़ती जागरूकता का ही नतीजा है कि अब तक विभाग को कुल 52,981 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से 35,551 आवेदनों को स्वीकृति मिल चुकी है और 35,521 बालिकाएं इस योजना से सीधे तौर पर लाभान्वित हुई हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी चंद्र भूषण के अनुसार, यह योजना न केवल बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा दे रही है, बल्कि लिंगानुपात में सकारात्मक सुधार और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर भी करारी चोट कर रही है। पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) में सभी श्रेणियों के कुल 15015 लाभार्थियों के साथ जिला पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा था। योजना के तहत मिलने वाली धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते (डीबीटी) में भेजी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भी अप्रैल माह से नए आवेदनों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।*छह चरणों में मिलता है 25 हजार का लाभ*योजना के तहत बेटियों को जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा तक छह अलग-अलग चरणों में आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि पहला लाभ बेटी के जन्म पर, दूसरा एक वर्ष बाद सभी अनिवार्य टीके लगने पर, तीसरा कक्षा एक में प्रवेश पर, चौथा कक्षा छह में, पांचवां कक्षा नौ में और छठा व अंतिम लाभ 10वीं या 12वीं पास करने के बाद दो वर्षीय डिप्लोमा या स्नातक में प्रवेश लेने पर मिलता है। सरकार द्वारा इस योजना के तहत दी जाने वाली कुल धनराशि को 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है। अधिकारी के मुताबिक, सबसे अधिक आवेदन जन्म और टीकाकरण वाले शुरुआती दो (फर्स्ट और सेकंड) चरणों में आते हैं।*पारदर्शिता पर जोर: सटीक दस्तावेजों से सुनिश्चित हो रहा लाभ*योजना का लाभ शत-प्रतिशत पात्र बालिकाओं तक पहुंचे, इसके लिए आवेदन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। प्राप्त कुल 52,981 आवेदनों की गहन जांच में करीब 17,351 आवेदन ऐसे पाए गए जो तय मानकों (जैसे- परिवार में दो से अधिक बच्चे न होना) को पूरा नहीं करते थे या उनमें टीकाकरण व शिक्षा से जुड़े जरूरी दस्तावेजों का अभाव था। विभाग ऐसे आवेदकों को निराश नहीं होने देता, बल्कि उन्हें मार्गदर्शन प्रदान करता है। यदि किसी का फॉर्म होल्ड या अस्वीकृत होता है, तो वह सीधे कार्यालय में संपर्क करके या प्रार्थना पत्र देकर दस्तावेजों की कमी को जान सकता है, ताकि भविष्य में वे त्रुटियों को सुधार कर सही तरीके से योजना का लाभ उठा सकें।*जागरूकता से रुकी बाल विवाह की कुप्रथा*कन्या सुमंगला योजना का सबसे बड़ा सामाजिक प्रभाव यह पड़ा है कि इलाके में बाल विवाह के मामलों में भारी कमी आई है। पहले जो शिकायतें बहुतायत में आती थीं, अब लोगों के योजना के प्रति जागरूक होने से वे काफी हद तक रुक गई हैं। विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों और न्याय पंचायत स्तर पर चौपाल लगाकर, जन सेवा केंद्रों के माध्यम से और आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं के जरिए लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। रोजाना करीब 30 से 35 लोग सीधे कार्यालय में आकर इस योजना से जुड़ी क्वेरी (जानकारियां) करते हैं। हालांकि, कई बार लोगों को यह भ्रम होता है कि यह पैसा हर महीने या हर साल मिलेगा, जिसे विभाग द्वारा शिकायत निवारण के दौरान दूर किया जाता है और उन्हें छह श्रेणियों के बारे में बताया जाता है।*मुख्यमंत्री डैशबोर्ड रैंकिंग में संभल का दबदबा*माह मार्च 2026 में विकास कार्यों से संबंधित मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की जारी रिपोर्ट के अनुसार, जिले ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और निराश्रित महिला पेंशन योजना, दोनों में ही प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। कन्या सुमंगला योजना में जिले का प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है। अगस्त 2024 से लेकर अब तक जिला लगातार प्रदेश के टॉप-3 में बना हुआ है और अक्टूबर 2024, दिसंबर 2024 से फरवरी 2025, अप्रैल से सितंबर 2025 और अब मार्च 2026 में पहले स्थान पर काबिज रहा। इसी तरह निराश्रित महिला पेंशन में भी जिले ने मार्च 2025 से जून 2025 तक और अब मार्च 2026 में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
