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Moradabad Prahari

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मुरादाबाद: स्मार्ट मीटर के ‘झटके’ से बेहाल उपभोक्ता, पीतल बस्ती उपकेंद्र पर भारी हंगामा,तकनीकी खराबी यह सरकार की मनमानी,कौन है जिम्मेदार?

ByMoradabadprahari

Mar 23, 2026

जानिए क्यों भड़के उपभोक्ता? उपकेंद्र पर पहुंची पलिस

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) की ‘स्मार्ट’ व्यवस्था अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बनती जा रही है। सोमवार को मुरादाबाद के पीतल बस्ती विद्युत उपकेंद्र पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित उपभोक्ताओं ने घेराव कर दिया। उपभोक्ताओं का सीधा आरोप है कि विभाग की लापरवाही और तकनीकी खामियों के कारण उनके घरों की बिजली गुल है, जबकि वे एडवांस भुगतान कर चुके हैं।

  • पैसा जमा, फिर भी अंधेरा: उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्होंने अपने मीटर रिचार्ज कर दिए हैं, लेकिन सर्वर की समस्या के कारण पैसा अपडेट नहीं हो रहा और बिजली नहीं आ रही।
  • बिना सूचना ‘प्रीपेड’ हुए मीटर: सबसे बड़ा आरोप यह है कि विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना या सहमति के पुराने मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मोड पर स्विच कर दिया। अब पैसे खत्म होते ही बिना चेतावनी व बिजली काट दी जाती है।
  • ठप पड़े विभागीय ऐप्स: उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के आधिकारिक ऐप पिछले कई घंटों से काम नहीं कर रहे हैं, जिससे न तो बैलेंस चेक हो पा रहा है और न ही रिचार्ज संभव है।
  • अधिकारियों की बेरुखी: प्रदर्शनकारियों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारी न तो मौके पर मौजूद हैं और न ही फोन उठा रहे हैं।
  • हम मजदूरी करके अपना घर चलाते हैं। सुबह से लाइन काट दी गई है। ऐप खुल नहीं रहा और दफ्तर में कोई सुनने वाला नहीं है। छोटे बच्चे गर्मी में परेशान हैं, लेकिन विभाग को सिर्फ राजस्व से मतलब है।”— एक व्यथित उपभोक्ता, पीतल बस्ती

तकनीकी दांवपेच में फंसी जनता पीतल बस्ती उपकेंद्र पर पहुंचे सैकड़ों लोगों ने विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने का उद्देश्य पारदर्शिता लाना था, लेकिन यह केवल उत्पीड़न का जरिया बन गया है। जब ऐप नहीं चलता, तो उपभोक्ता बिजली दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर होता है, जहाँ उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।

कौन है जिम्मेदार?

इस पूरे घटनाक्रम ने स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट की तैयारियों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। क्या विभाग का इंफ्रास्ट्रक्चर इतना कमजोर है कि वह लोड और ट्रांजैक्शन संभाल नहीं पा रहा? अधिकारियों की चुप्पी उपभोक्ताओं के गुस्से में घी डालने का काम कर रही है।

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