
17 दिसंबर को मुरादाबाद बंद का आवाहन, जनता से सहयोग की अपील… आनन्द मोहन
मुरादाबाद,
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए न्याय का द्वार सैकड़ों किलोमीटर दूर है। न्याय तक आसान पहुंच की यह लड़ाई, मुरादाबाद में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग के रूप में, 1980 से चली आ रही यह मांग आज 45 वर्ष पुरानी हो चुकी है। यह केवल वकीलों की मांग नहीं, बल्कि आवश्यकता और तर्क पर आधारित पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विशाल आबादी की एक पूरी तरह जायज और मूलभूत मांग है।
भौगोलिक दूरी और न्यायिक असंतुलन
वर्तमान में, मुरादाबाद मंडल सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नागरिकों को अपने न्यायिक मामलों के लिए लगभग 600 से 700 किलोमीटर की लंबी और खर्चीली यात्रा तय करके इलाहाबाद हाईकोर्ट जाना पड़ता है।
इतनी लंबी दूरी तय करने में समय, धन और शारीरिक श्रम का भारी नुकसान होता है। रेल यात्रा एवं परिवहन पर भीड़ भी बढ़ती है गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए न्याय पाना एक दुःस्वप्न जैसा बन जाता है। कई बार, दूरी और खर्च के कारण वे छोटे मामलों में वादकारी न्याय की उम्मीद ही छोड़ देते हैं, जिससे न्याय प्रणाली पर आमजन का विश्वास कमजोर होता है।
क्योंकि उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। ऐसे विशाल राज्य में केवल एक मुख्य हाईकोर्ट (इलाहाबाद) और एक सीमित बेंच (लखनऊ) का होना न्यायिक असंतुलन को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यह स्थिति ‘न्याय में देरी, न्याय से वंचित’ की कहावत को चरितार्थ करती है।
मुरादाबाद की केंद्रीय और रणनीतिक स्थिति इसे बेंच की स्थापना के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है
केंद्रीय स्थान मुरादाबाद पश्चिमी यू.पी. के प्रमुख जिलों जैसे बिजनौर, रामपुर, अमरोहा, संभल आदि के लिए एक मुख्य केंद्र है , साथ ही साथ गाजियाबाद मेरठ हापुर सहारनपुर शामली नजीबाबाद जैसे आसपास के जिलों के सीधे संपर्क में आता है
वकीलों और नागरिकों की सहूलियत मुरादाबाद में बेंच की स्थापना से न केवल मुरादाबाद मंडल, बल्कि आसपास के अन्य जिलों के लाखों नागरिकों और हजारों वकीलों को सीधे लाभ मिलेगा।
न्याय की गति बेंच की स्थापना से हाईकोर्ट पर मामलों का बोझ कम होगा, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और त्वरित न्याय सुनिश्चित होगा।
45 साल का संघर्ष: अब और नहीं
इस मांग को लेकर वकीलों और सामाजिक संगठनों द्वारा दशकों से आंदोलन किए जा रहे हैं। उनका स्पष्ट मत है कि न्याय नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है, और सरकार को इस बुनियादी आवश्यकता पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।
मुरादाबाद में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना मात्र एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि लाखों लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय प्रदान करने की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक और न्यायसंगत कदम होगा। यह न्याय प्रणाली पर आमजन के विश्वास को मजबूत करेगा और भारतीय लोकतंत्र के ‘न्याय सबके लिए’ के आदर्श को सही मायने में जमीन पर उतारेगा।
