| शिकायतों और जांच के बाद हुई कार्रवाई, आय से अधिक संपत्ति के आरोपों ने भी बढ़ाई हलचल |

मेरठ। मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) में करीब 15 वर्षों से मेट के पद पर कार्यरत ऋषिपाल को कथित फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों के मामले में आखिरकार सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष संजय मीणा की ओर से सेवा समाप्ति का आदेश जारी किए जाने की जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है।
मामला सामने आने के बाद प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और नियुक्ति के दौरान शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच
सूत्रों के अनुसार, ऋषिपाल की नियुक्ति से संबंधित शैक्षिक प्रमाणपत्रों को लेकर पिछले वर्ष मेरठ मंडलायुक्त के समक्ष शिकायत की गई थी। इसके बाद समाजवादी पार्टी से जुड़े नेता सूर्यप्रकाश शेरा ने भी प्राधिकरण में शिकायत कर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की थी।शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नौकरी हासिल करने के लिए प्रस्तुत किए गए शैक्षिक प्रमाणपत्र और मार्कशीट वास्तविक नहीं हैं।
मामले की जांच कराई गई तो संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर गंभीर सवाल सामने आए। इसके बाद लंबे समय से चल रहे मामले में अब सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई है।
जांच के बाद भी कार्रवाई में देरी क्यों?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच में दस्तावेजों को फर्जी पाया गया था तो कार्रवाई होने में इतना समय क्यों लगा?
सूत्रों का दावा है कि शिकायत और जांच के बावजूद कई महीनों तक कार्रवाई लंबित रही।अब बर्खास्तगी के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि नियुक्ति के समय शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया था और यदि सत्यापन नहीं हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी?
करीब 20 करोड़ की संपत्ति का भी आरोप
मामले में ऋषिपाल की कथित संपत्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, शिकायतकर्ताओं की ओर से दावा किया गया है कि करीब 15 वर्ष की सेवा के दौरान ऋषिपाल ने लगभग 20 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की।इस संबंध में आय से अधिक संपत्ति की शिकायत राज्य सरकार के स्तर पर किए जाने की भी जानकारी सामने आ रही है।
हालांकि, ₹20 करोड़ की संपत्ति के दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने आना बाकी है। इसलिए इस पहलू की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
बर्खास्तगी के बाद अब संपत्ति की जांच पर नजर
ऋषिपाल की सेवा समाप्ति के बाद अब निगाह इस बात पर है कि कथित आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर शासन या संबंधित जांच एजेंसी क्या कार्रवाई करती है।
यदि संपत्ति संबंधी आरोपों की जांच होती है तो नियुक्ति से लेकर अब तक की आय, वेतन, चल-अचल संपत्तियां और संपत्ति अर्जित करने के स्रोत भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
15 साल तक सिस्टम की नजर से कैसे बचा मामला?
मामले ने MDA की नियुक्ति एवं दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो यह भी जांच का विषय होगा कि संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन नियुक्ति के समय क्यों नहीं हुआ और कथित तौर पर इतने वर्षों तक मामला लंबित कैसे रहा।
अब देखना यह है कि सेवा समाप्ति की कार्रवाई के बाद कथित फर्जी प्रमाणपत्र और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
नोट: खबर में संपत्ति से संबंधित ₹20 करोड़ का आंकड़ा तथा अन्य आरोप सूत्रों/शिकायत में लगाए गए दावों पर आधारित हैं। संबंधित व्यक्ति का पक्ष और आधिकारिक जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
