
KOHLI RHSC ATS Pvt Ltd कर रहा है ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर का संचालन

वायरल वीडियो में मुरादाबाद सहित कानपुर बरेली हरदोई बिजनौर गाजियाबाद झांसी के नाम सामने आए हैं
संवाददाता,पूरे प्रदेश के वाहन मालिकों के साथ धोखा! परिवहन विभाग द्वारा फिटनेस सेंटरों के निजीकरण (Privateization) के बाद भ्रष्टाचार खत्म होने की उम्मीद थी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। खबरें हैं कि ‘फिटनेस’ के नाम पर परिवहन विभाग से जुड़ीं एजेंसियां पहले से भी ज्यादा वसूली कर रही हैं, जिससे प्रदेशभर में हड़कंप मच गया है। वसूली का खेल: रिश्वत की रकम हुई दोगुनी!राज्य भर के ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर्स (ATS) के संचालन की जिम्मेदारी निजी फर्मों को सौंपे जाने के बाद से ही शिकायतों का अंबार लग गया है। वाहन मालिकों का आरोप है कि उन्हें निर्धारित सरकारी शुल्क से दो से तीन गुना तक अधिक रकम चुकानी पड़ रही है। निजी सेंटरों की मनमानी: आरोप है कि निजी एजेंसियां फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के लिए रिश्वत की रकम को दुगना कर रही हैं। कई मामलों में तीन से चार गुना तक अवैध वसूली की शिकायतें सामने आई हैं। ‘नहीं तो फेल’: वाहन मालिकों का कहना है कि रिश्वत न देने पर उनकी गाड़ियों को फिटनेस जांच में जानबूझकर फेल कर दिया जाता है, जिससे उन्हें मजबूरन मनमानी रकम देनी पड़ती है। बड़े शहरों से शिकायतें: झांसी, गाजियाबाद, मुरादाबाद और अन्य जिलों के निजी फिटनेस सेंटरों पर खुलेआम ओवरचार्जिंग की खबरें सामने आई हैं, जो दर्शाती हैं कि यह समस्या एक व्यापक सिंडिकेट का रूप ले चुकी है। भ्रष्टाचार खत्म हुआ या बढ़ा?परिवहन विभाग ने भ्रष्टाचार और दलालों की प्रथा खत्म करने के लिए ही इस प्रक्रिया का निजीकरण किया था। लेकिन सवाल यह है कि:> “जब काम प्राइवेट हाथों में गया, तो वसूली और रिश्वतखोरी कम क्यों नहीं हुई, बल्कि कई जगहों पर पहले से ज्यादा क्यों हो गई? क्या यह सिर्फ स्थान का बदलाव है, जहां दलाली आरटीओ ऑफिस से निकलकर अब निजी सेंटरों के गेट पर पहुंच गई है?” विभाग की कार्रवाई और चुनौती गोपनीय जांच: शिकायतों के बाद, परिवहन विभाग ने कुछ निजी सेंटरों पर गोपनीय तरीके से निगरानी और जांच शुरू की है। FIR दर्ज: कुछ स्थानों पर वसूली सही पाए जाने पर सेंटरों के संचालक, मैनेजर और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है।प्रदेश में ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर (एटीएस) में झांसी, गाजियाबाद और बिजनौर कानपुर देहात, वाराणसी, मुरादाबाद और बरेली में ये एटीएस सेन्टर संचालित हैं इन सभी का संचालन निजी फर्म कर रही है। जबकि, लखनऊ में वाहन परीक्षण एवं प्रमाणीकरण केंद्र है। यहां निजी कंपनी के कार्मिकों के साथ ही विभागीय कार्मिक भी मौजूद रहते हैं। संचालक, मैनेजर सहित 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्जझांसी में सेंटर शुरू होते ही यहां विभाग की ओर से निर्धारित शुल्क से तीन से चार गुना वसूली शुरू हो गई। जांच में मामला सही पाए जाने संभागीय निरीक्षक (आरआई) संजय सिंह ने फिटनेस सेंटर के संचालक, मैनेजर सहित 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। अन्य सेंटर से भी शिकायतें आ रही हैं। सिर्फ निजी वाहनों का नहीं: यह समस्या केवल कॉमर्शियल वाहनों तक सीमित नहीं है, निजी वाहनों के फिटनेस शुल्क में भी अवैध वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं।यह पूरा घटनाक्रम परिवहन विभाग में प्राइवेटाइजेशन के बाद बढ़ते भ्रष्टाचार के ‘खेल’ को उजागर करता है और सरकार की ‘भ्रष्टाचार मुक्त’ व्यवस्था के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। अब देखते हैं मुरादाबाद में इन फिटनेस सेंटर परआगे क्या कार्यवाही होती है ?
