
मुरादाबाद शहर स्थित पंचायत भवन परिसर में चल रहे स्वदेशी मेला–2025 के पंचम दिवस का आयोजन उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। पांचवें दिवस में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शेफाली चौहान उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ, इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं शॉल भेंट कर किया गया।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि डॉ. शेफाली सिंह ने कहा कि “स्वदेशी मेला हमारे देश की आत्मा- मिट्टी, खादी और कारीगरों की मेहनत को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है। हमें गर्व होना चाहिए कि हमारे कारीगर और उद्यमी ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को साकार कर रहे हैं। माटी से बने उत्पाद और खादी के परिधान न केवल हमारी संस्कृति के प्रतीक हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उठाया गया मजबूत कदम भी हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करते हैं और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं। हर नागरिक को चाहिए कि वह अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दे।
मेले में बड़ी संख्या में आगंतुकों ने भाग लिया और विभिन्न स्टॉलों पर खरीदारी की। लोगों ने विशेष रूप से माटी से बने शिल्प, खादी वस्त्र, घरेलू उत्पादों, आभूषणों और हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुओं में गहरी रुचि दिखाई।
डॉ. शेफाली चौहान ने स्वयं भी कई स्वदेशी उत्पाद खरीदे और कारीगरों से बातचीत कर उनके कार्य की सराहना की और इस पहल को सराहते हुए कारीगरों का उत्साहवर्धन किया।
स्वदेशी मेला 2025 में स्थानीय कलाकारों द्वारा लगाए गए स्टॉल्स ने पारंपरिक कला और स्वदेशी उद्योग को नई पहचान दी है।
स्वदेशी मेले में मुज़म्मिल द्वारा लगाया गया चीनी मिट्टी उत्पादों का स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
मुज़म्मिल ने अपने स्टॉल पर चीनी मिट्टी से बने दीये, फूलदान, धूपबत्ती स्टैंड एवं अन्य सजावटी सामानों का प्रदर्शन किया। उनके द्वारा तैयार किए गए ये सभी उत्पाद अपनी सुंदरता, बारीक कारीगरी और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण आगंतुकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहे हैं।
मेले में आए लोगों ने मुज़म्मिल की कला और उनकी मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कारीगर स्वदेशी हस्तकला को नई ऊँचाइयाँ दे रहे हैं और पर्यावरण हितैषी उत्पादों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ा रहे हैं।
स्वदेशी मेला 2025 में इस वर्ष स्वदेशी कला, हस्तशिल्प और स्थानीय उद्यमिता की झलक बखूबी देखने को मिली। मेले में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों और उद्यमियों ने अपने-अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर स्वदेशी भावना को नई ऊँचाइयाँ दीं।
मेले में लगाए गए स्टॉल्स में शिवांश सक्सेना का माटीकला स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जहाँ उन्होंने मिट्टी के दीये, आकर्षक बॉटल डिज़ाइन और गोबर से बने पर्यावरण अनुकूल उत्पादों का प्रदर्शन किया। इन उत्पादों ने न केवल लोगों का ध्यान खींचा बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी कला के संवर्धन का संदेश भी दिया।
इसी क्रम में शिवम द्वारा लगाया गया माटीकला स्टॉल भी लोगों को बेहद पसंद आया। उन्होंने मिट्टी से निर्मित सुंदर खिलौने, शोपीस और गणेश जी की मूर्तियाँ प्रदर्शित कीं, जिनकी बारीक कारीगरी ने आगंतुकों का मन मोह लिया।
महिला उद्यमिता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सलमा जी ने हैंडमेड जूट बैग्स का स्टॉल लगाया, जिन पर आकर्षक और आधुनिक डिज़ाइन बनाए गए थे। उनके पर्यावरण अनुकूल उत्पादों ने न केवल खरीदारों को आकर्षित किया बल्कि स्वदेशी हस्तकला और आत्मनिर्भरता का संदेश भी दिया।
स्वदेशी मेला 2025 में लगे इन सभी स्टॉल्स ने यह सिद्ध किया कि हमारे युवा और कारीगर अपनी प्रतिभा और परिश्रम से पारंपरिक कला को नई पहचान दे रहे हैं। यह मेला “वोकल फॉर लोकल” की भावना को साकार करता हुआ आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रहा है।
कार्यक्रम का संचालन उत्साहपूर्वक किया गया और समापन पर आयोजकों ने मुख्य अतिथि सहित सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
