
कांठ। कांठ नगर में प्रशासन द्वारा गठित श्री रामलीला मंचन अस्थायी समिति के तत्वावधान में चल रहे 117वें वार्षिक रामलीला महोत्सव में बुधवार की रात सीताहरण लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बिश्नोई समाज के संत स्वामी प्रणवानंद महाराज जी ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर संत सवानी प्रणवानंद महाराज जी ने कहा कि भगवान राम का जीवन त्याग, मर्यादा और आदर्शों का प्रतीक है। सीता हरण की मार्मिक लीला हमें यह सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवान राम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। सीताहरण के मंचन के दौरान जैसे ही मारीच स्वर्ण मृग के रूप में आया और सीता जी के कहने पर भगवान राम उसके पीछे गए, और रावण साधु वेश में सीता हरण कर ले गया, तो पूरा पंडाल भावुक हो उठा। कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा।
सीता जी के विलाप और लक्ष्मण की विवशता के दृश्य ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं।इस अवसर पर रामलीला समिति के कार्यकारी अध्यक्ष धीरज कुमार बिश्नोई, निर्देशक सुधीर कुमार बिश्नोई,कोषाध्यक्ष नवनीत पहलवान,विनोद नंबरदार,राधेश्याम भुईयार, डॉ त्रिदेव भूईयार, विजय चौहान उर्फ सीटू,संजय नंबरदार,सुरेन्द्र विश्नोई,राजीव कुमार उर्फ पिंटू बिश्नोई, राकेश बिश्नोई सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नगरवासी उपस्थित रहे।
