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डिजिटल युग में इंटरनेट की अनिवार्यता और शहरी विकास में लापरवाही,किस हद तक की जा सकती है : एक रिपोर्ट

ByMoradabadprahari

Oct 11, 2026

आज का दौर सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल क्रांति का युग है। इंटरनेट अब केवल मनोरंजन या विलासिता की वस्तु नहीं रह गया है, बल्कि यह आम नागरिकों के दैनिक जीवन, शिक्षा, व्यवसाय, बैंकिंग और आपातकालीन सेवाओं की रीढ़ बन चुका है। डिजिटल युग में इंटरनेट और इसीके साथ शहर की सुरक्षा व्यवस्था भी बड़े पैमाने पर फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क और सीसीटीवी कैमरों पर निर्भर करती है।लेकिन विडंबना यह है कि जब विकास और रखरखाव के नाम पर प्रशासनिक या सरकारी विभागों की उदासीनता सामने आती है, तो यह आधुनिक व्यवस्था चरमरा जाती है।

मुख्य बिंदु

इंटरनेट बुनियादी जरूरत: आज के समय में इंटरनेट पानी, बिजली और सड़क की तरह एक अनिवार्य नागरिक सेवा है। इसके बिना सरकारी और निजी दोनों कार्य बाधित होते हैं।

फाइबर और सीसीटीवी नेटवर्क की भूमिका: शहर की कानून-व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे ऑप्टिकल फाइबर के जरिए ही सुचारू रूप से काम करते हैं।

लापरवाही और मनमानी: नगर निगम या बिजली विभाग द्वारा पेड़ों की छंटाई या रख-रखाव के नाम पर बिना किसी पूर्व सूचना या सावधानी के फाइबर लाइनें काट दी जाती हैं।

आम जनता और प्रशासन को भारी नुकसान: केबल कटने से न केवल इंटरनेट सेवाएं ठप होती हैं, बल्कि निगरानी तंत्र टूटने से सुरक्षा खतरे में पड़ती है और स्थानीय कारोबारियों व नागरिकों को भारी आर्थिक व मानसिक नुकसान उठाना पड़ता है।

समाधान और अपेक्षाएं

संबंधित विभागों (नगर निगम और विद्युत विभाग) को यह समझना होगा कि डिजिटल बुनियादी ढांचा भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अन्य भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर। पेड़ की कटाई या अन्य विकास कार्यों के दौरान टेलीकॉम और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वय होना चाहिए ताकि बिना किसी व्यवधान के शहर की डिजिटल सेवाएं सुरक्षित रह सकें।

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