
बिलारी (मुरादाबाद), 20 सितंबर 2026। बिलारी स्थित अटल आवासीय विद्यालय में आनंदघन लोक शिक्षा केंद्र, पुनरुत्थान विद्यापीठ के तत्वावधान में शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं के मध्य “भारतीय ज्ञान एवं कर्मयोग” विषय पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता स्वामी कृष्णानंद झा ने भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा के उद्देश्य और कर्मयोगी व्यक्तित्व निर्माण पर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से संवाद किया।
स्वामी कृष्णानंद झा ने कहा कि भारतीय ज्ञान केवल पढ़ने अथवा डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ज्ञान, चरित्र, कर्तव्य और जीवन निर्माण की समग्र व्यवस्था रहा है। भारतीय परंपरा में चतुर्दश विद्या के अंतर्गत चार वेद, छह वेदांग, न्याय, पुराण, धर्मशास्त्र और मीमांसा का समावेश था। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल में भारतीय शिक्षा व्यवस्था और ज्ञान परंपरा को गंभीर क्षति पहुंची, जिसके कारण शिक्षा का संबंध जीवन-मूल्यों और कर्तव्य बोध से कमजोर हुआ।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता ऐसी शिक्षा व्यवस्था की है जो केवल रोजगार के लिए नहीं, बल्कि चरित्रवान, संस्कारवान और कर्मयोगी व्यक्तित्व का निर्माण करे। शिक्षा व्यक्ति में परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व तथा सेवा-भाव विकसित करे।
गीता प्रचारक स्वामी कृष्णानंद झा ने श्रीमद्भगवद्गीता और रामचरितमानस का संदर्भ देते हुए कहा, “कर्मयोगी बनना है तो गीता पढ़ो और चरित्र का निर्माण करना है तो रामचरित पढ़ो।” उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम को आदर्श मानकर जीवन में कर्तव्य, मर्यादा, सेवा और समर्पण के भाव अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को “भारत को जानो, भारत को मानो, भारतीय बनो” का सूत्र देते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्स्थापन और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
