
मुरादाबाद, जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया एवं मुख्य विकास अधिकारी सुश्री मृणाली अविनाश जोशी की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट सभागार में ग्राम गजेटियर तैयार किए जाने के संबंध में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) विशेषज्ञ द्वारा ग्राम गजेटियर को अधिक सटीक, व्यापक एवं उपयोगी बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों के पोर्टलों पर उपलब्ध ग्राम स्तर के आंकड़ों एवं योजनाओं के डेटा के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई।प्रशिक्षण में बताया गया कि ग्राम गजेटियर तैयार करने के लिए 42 विभागों के आंकड़ों का समन्वित रूप से उपयोग किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक ग्राम की सामाजिक, आर्थिक, आधारभूत सुविधाओं एवं सरकारी योजनाओं से संबंधित अद्यतन जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध हो सकेगी।
एआई तकनीक के माध्यम से डेटा संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जाएगा तथा त्रुटियों को न्यूनतम स्तर पर लाने का प्रयास किया जाएगा।जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने निर्देश दिए कि ग्राम गजेटियर तैयार करने की प्रक्रिया में जुड़े सभी सहायक विकास अधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों, अधिशासी अधिकारियों, सचिवों एवं लेखपालों को भी चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, ताकि ग्राम स्तर पर गुणवत्तापूर्ण एवं त्रुटिरहित डेटा संकलित किया जा सके।प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि एआई आधारित प्रणाली में डेटा प्रविष्टि इस प्रकार विकसित की जा रही है कि आवश्यक जानकारी अधूरी होने की स्थिति में अगले चरण की प्रविष्टि संभव नहीं होगी। इससे ग्राम गजेटियर में किसी प्रकार की सूचना का अभाव नहीं रहेगा तथा उसकी विश्वसनीयता और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। अगले चरण में विभागवार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे सभी संबंधित विभागों द्वारा अपने-अपने डेटा का समयबद्ध एवं शुद्ध संकलन सुनिश्चित किया जा सके।जिलाधिकारी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की सहायता से तैयार किया जा रहा ग्राम गजेटियर न केवल आकर्षक एवं सटीक होगा, बल्कि शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्राम स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा योजनाओं की नियमित मैपिंग में भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। उन्होंने बताया कि ग्राम गजेटियर को एप के माध्यम से मासिक रूप से अपडेट करने की व्यवस्था भी की जा रही है, जिससे शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं की प्रगति का निरंतर आकलन एवं प्रभावी अनुश्रवण सुनिश्चित किया जा सके।
