
स्मार्ट सिटी का कैसा ‘स्मार्ट’ ढर्रा?
क्या कर रहे हैं नगर निगम के कर्मचारी?
मुरादाबाद। “फुटपाथ आम जनता के चलने के लिए होते हैं, अतिक्रमण के लिए नहीं।” हाल ही में देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह सख्त टिप्पणी की थी। लेकिन पीतलनगरी मुरादाबाद में सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों की धज्जियां सरेआम उड़ाई जा रही हैं। शहर के व्यस्ततम इलाकों में शुमार ताड़ी खाने से लेकर गंज गुरट्टी तक के फुटपाथों का वजूद ही खत्म हो चुका है। यहाँ पैदल चलने वालों के लिए बनाई गई जगह पर अब आलीशान कारें शान से पार्क हो रही हैं और जिम्मेदार नगर निगम आंखें मूंदे बैठा है।
मुरादाबाद को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। कागजों पर तो शहर को आधुनिक और सुगम बनाने के बड़े-बडे़ दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ताड़ी खाने से गंज गुरट्टी मार्ग पर स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि पैदल यात्रियों को अपनी जान जोखिम में डालकर मुख्य सड़क पर गाड़ियों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। सवाल यह उठता है कि क्या स्मार्ट सिटी की परिभाषा में फुटपाथों पर अवैध पार्किंग को हरी झंडी देना शामिल है? स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत आखिरकार इन अतिक्रमणकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?
सड़कें गाड़ियों के चलने के लिए हैं और फुटपाथ पैदल यात्रियों के सुरक्षित सफर के लिए। लेकिन जब फुटपाथ ही गायब हो जाएं, तो बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को मुख्य सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे हर वक्त किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है। ताड़ी खाने से गंज गुरट्टी तक लगने वाले इस जाम और अवैध कब्जे ने स्थानीय दुकानदारों और ग्राहकों की परेशानी को भी कई गुना बढ़ा दिया है।
