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Moradabad Prahari

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सुरक्षित विद्यालय और अस्पताल: आग से बचाव के लिए जन-जागरूकता ही सबसे बड़ा कवच,निबंध और चित्रकला के माध्यम से दिया सुरक्षा का संदेश

ByMoradabadprahari

Apr 16, 2026

मुरादाबाद ,15 अप्रैल, 2026, अग्नि सुरक्षा केवल एक वैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन बचाने का प्राथमिक संकल्प है। इसी उद्देश्य के साथ, वर्ष 1944 के मुंबई बंदरगाह अग्निकांड के शहीदों को नमन करते हुए, मुरादाबाद के विभिन्न क्षेत्रों में अग्निशमन सेवा सप्ताह के अंतर्गत जागरूकता अभियान जोरों पर है।बुधवार को जनपद के स्कूलों में विशेष ‘फायर सेफ्टी’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों और शिक्षकों को आपात स्थिति के लिए तैयार करना था।2026 की थीम: सामूहिक भागीदारी पर जोरअग्निशमन विभाग द्वारा इस वर्ष की थीम “सुरक्षित विद्यालय, सुरक्षित अस्पताल एवं अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक समाज: आग की रोकथाम के लिए एक साथ” निर्धारित की गई है। यह थीम स्पष्ट करती है कि अग्नि सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल विभाग की नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक की है। विशेषकर स्कूलों और अस्पतालों जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है।स्कूलों में दी गई ‘लाइव’ ट्रेनिंग15 अप्रैल को आयोजित अभियान के दौरान अग्नि विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं को व्यावहारिक ज्ञान दिया। कार्यक्रम के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशमन यंत्र) का प्रयोग: ‘PASS’ (Pull, Aim, Squeeze, Sweep) तकनीक के माध्यम से बच्चों को बताया गया कि आग लगने के शुरुआती पलों में यंत्र का उपयोग कैसे करें।इमरजेंसी इवैक्युएशन (आपातकालीन निकासी): बिना भगदड़ मचाए, सुरक्षित तरीके से स्कूल भवन से बाहर निकलने का मॉक ड्रिल कराया गया।प्राथमिक चिकित्सा: आग से झुलसने या धुएं के कारण दम घुटने की स्थिति में दी जाने वाली प्राथमिक सहायता के बारे में शिक्षकों को जागरूक किया गया।क्यों मनाया जाता है यह दिन?पाठकों को बता दें कि 14 अप्रैल 1944 को मुंबई के विक्टोरिया डॉक पर ‘एसएस फोर्ट स्टिकिन’ मालवाहक जहाज में भीषण विस्फोट और आग लगी थी। इस दौरान 66 अग्निशमन कर्मियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए वीरगति प्राप्त की थी। उन्हीं की स्मृति में हर साल यह दिवस और इसके बाद का पूरा सप्ताह जागरूकता के लिए समर्पित रहता है

कैनवस पर दिखी अग्नि वीरों की गाथा चित्रकला प्रतियोगिता में प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। नन्हे हाथों ने रंगों और कूची के माध्यम से 1944 के मुंबई डॉक विस्फोट के दृश्यों से लेकर आधुनिक फायर फाइटर्स की बहादुरी को कागज़ पर उतारा।

इस अभियान ने यह साबित कर दिया कि यदि नई पीढ़ी को जागरूक किया जाए, तो भविष्य में अग्नि दुर्घटनाओं के आंकड़ों में भारी कमी लाई जा सकती है। मुरादाबाद के विभिन्न स्कूलों से चुनकर आए सर्वश्रेष्ठ पोस्टरों को विभाग द्वारा सार्वजनिक प्रदर्शनी में भी लगाया जाएगा।

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