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सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: “अगर खरीदारों को न्याय नहीं मिल रहा, तो बंद कर दें RERA”

ByMoradabadprahari

Mar 9, 2026

बिल्डरों के प्रति नरम रुख पर भड़का कोर्ट; मुरादाबाद जैसे शहरों में भी ‘सिस्टम’ को ठेंगा दिखा रहे बिल्डर

​”रेरा है या बिल्डरों का ढाल?” – कोर्ट के कड़े सवाल

​नई दिल्ली , रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने के लिए बनाया गया RERA (Real Estate Regulatory Authority) अब खुद सुप्रीम कोर्ट के निशाने पर है। देश की सर्वोच्च अदालत ने रेरा की लचर कार्यप्रणाली और बिल्डरों के प्रति उसके ‘दोस्ताना’ रवैये पर गहरी नाराजगी जताते हुए इसे ‘समाप्त’ या ‘बंद’ करने तक की चेतावनी दे दी है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने एक मामले की सुनवाई के दौरान बेहद सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि अगर रेरा का मूल मकसद (खरीदारों के हितों की रक्षा) पूरा नहीं हो रहा है, तो ऐसी संस्था को चलाने का कोई औचित्य नहीं है। इसे बंद कर देना ही बेहतर है।
बेंच ने टिप्पणी की कि रेरा संस्थाएं खरीदारों के बजाय डेवलपर्स के हितों की रक्षा करने वाला ‘सुरक्षा कवच’ बन गई हैं। कोर्ट ने पाया कि रेरा के आदेशों के बावजूद बिल्डर न तो प्रोजेक्ट समय पर पूरे कर रहे हैं और न ही उन पर कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट की यह फटकार मुरादाबाद जैसे शहरों के लिए भी एक बड़ा रियलिटी चेक है। यहाँ कई रसूखदार बिल्डर नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं
सील परिसर में निर्माण ,के शहर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ प्राधिकरण द्वारा सील किए गए परिसरों पर बिल्डरों ने अपना बोर्ड लगाकर अवैध रूप से निर्माण जारी रखा है।
प्राधिकरण के कुछ संविदा कर्मचारी और अधिकारी कथित तौर पर बड़े अधिकारियों को अंधेरे में रख रहे हैं, जिससे अवैध निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है।
अपने रसूख और पहुंच का इस्तेमाल कर बिल्डर आम खरीदार की शिकायतों को ठंडे बस्ते में डलवा देते हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी का असल मकसद रेरा को खत्म करना नहीं, बल्कि उसे शक्तिशाली और जवाबदेह बनाना है। यह संदेश साफ है कि यदि रेरा को अस्तित्व में रहना है, तो उसे बिल्डरों के प्रति अपना ‘नरम रुख’ छोड़कर घर खरीदारों के लिए एक असली सुरक्षा कवच के रूप में काम करना होगा। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को भी सोचना होगा की किस तरीके से बिल्डरों का दबाव काम किया जाए क्योंकि बड़े-बड़े बिल्डर ही प्राधिकरण के कर्मचारियों को अपनी उंगलियों पर नाचते हैं और कर्मचारी उनकी उंगलियों पर नाचते रहते हैं मंडल आयुक्त ने इस पर सख्त नाराजगी जताई है

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