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Moradabad Prahari

News Paper

अमरोहा के जे एस हिन्दू स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गुरु जम्भेश्वर का दार्शनिक चिंतन विषय पर एक द्विदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया

ByMoradabadprahari

Jan 20, 2026

अमरोहा,

जे.एस. हिन्दू पी.जी.कॉलेज अमरोहा में गुरु जंभेश्वर का दार्शनिक चिंतन विषय पर भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा संपोषित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ, जिसके उपरांत सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। तत्पश्चात विश्वविद्यालय का कुलगीत (विश्व में चमके निरन्तर विश्वविद्यालय हमारा) ऐश्वर्या एवं उनके साथियों द्वारा सस्वर गाया गया,जिसने सभागार को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित विश्नोई समाज के प्रख्यात संत स्वामी कृष्णानंद जी महाराज (ऋषिकेश) ने अपने उद्बोधन में अमरोहा को “आम की मिठास की नगरी” बताते हुए कहा कि गुरु जंभेश्वर जी का सम्पूर्ण जीवन भी व्यवहारिक मिठास और करुणा का प्रतीक है। उन्होंने हिंदू परंपरा में गुरु गोरखनाथ और गुरु जंभेश्वर के दर्शन की समानताओं पर प्रकाश डालते हुए अग्नि पूजा के प्रावधान और उस युग में जाम्भ दर्शन के प्रादुर्भाव का उल्लेख किया,जब लेखन-पठन का व्यापक प्रचलन नहीं था।गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद के कुलपति प्रो. सचिन माहेश्वरी ने कहा कि गुरु जंभेश्वर द्वारा प्रतिपादित 29 नियम एक आदर्श जीवनशैली के प्रतिमान हैं। उन्होंने गुरु जंभेश्वर को पर्यावरणीय परिस्थितियों का प्रथम दृष्टा बताते हुए गुरु जंभेश्वर के दर्शन को मूल्यों का उत्प्रेरक बताया।

विषय प्रवर्तक प्रख्यात विद्वान प्रो. विनय विद्यालंकार ने अपने विचार रखते हुए कहा कि संसार रूपी वृक्ष में कड़वाहट और मिठास दोनों हैं। उन्होंने आस्तिक और नास्तिक धाराओं के दार्शनिक दृष्टिकोण पर विमर्श करते हुए कहा कि आधुनिक युग में विज्ञान ने धर्म का स्थान लेने का प्रयास किया है, किंतु दोनों का समन्वय ही मानवता के लिए कल्याणकारी है। गुरु जम्भेश्वर का दर्शन व्यक्ति, समाज एवं संसार को उपादेय है।प्रो. विद्यालंकार ने वैदिक दर्शन, भारतीय षड्दर्शन, उपनिषद, ब्राह्मणग्रन्थ आदि के आलोक में जम्भेश्वर विचारों की मीमांसा प्रस्तुत की।
संगोष्ठी के अध्यक्ष प्रो. अखिलेश मिश्र ने कहा कि गुरु जंभेश्वर का दर्शन तुलनात्मक अध्ययन का सशक्त आधार प्रदान करता है। वहीं प्राचार्य प्रो. वीर वीरेंद्र सिंह ने बीएसएफ द्वारा काले हिरण के संरक्षण को गुरु जंभेश्वर भगवान की शिक्षा और दीक्षा का जीवंत उदाहरण बताया।
उन्होंने सभी आगन्तुकों एवं भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया, तथा महाविद्यालय के आयोजक मंडल के साथियों की भी सराहना की। उन्होंने नये शोधार्थियों के लिए संगोष्ठी के महत्त्व को भी दर्शाया।
इस अवसर पर प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री संजय मालीवाल और मंत्री श्री योगेश कुमार जैन ने आयोजन की सराहना की।
उद्घाटन सत्र का संचालन कर रहे संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अरविन्द कुमार ने बताया कि इस दो दिवसीय संगोष्ठी में 350 प्रतिभागियों ने पंजीकरण किया है। जिनमें से शोधपत्र प्रस्तुत कर्ताओं को आठ तकनीकी सत्रों में विभाजित कर विचार विमर्श का अवसर दिया गया है। प्रत्येक सत्र में वरिष्ठ विद्वान सत्राध्यक्ष तथा अन्य विद्वान विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहेंगे। लगभग आठ राज्यों के विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक और शोधार्थी इस संगोष्ठी में भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर डाॅ. अरविन्द कुमार द्वारा सम्पादित पुस्तक दयानन्द दर्शन के विविध आयाम का भी विमोचन हुआ।
भोजनोपरांत संगोष्ठी के चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। जिनमें दो सत्र अभिनन्दन जैन सभागार में और दो सुदर्शन सभागार में आयोजित हुए। जिनमें अध्यक्षता प्रो. बाबूराम, प्रो. अभय रंजन, डाॅ. कृष्णलाल विश्नोई ने की। इन सत्र में दयानन्द काॅलेज हिसार से डॉ. सुरेंद्र बिश्नोई, दिल्ली विश्वविद्यालय से डाॅ. संजय कुमार,डाॅ. राजमंगल यादव, महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली से डाॅ. अजीत सिंह, दास काॅलेज बदायूं से डाॅ. बी.एन. शुक्ल, राजकीय महाविद्यालय ग्वालियर से डाॅ. अशोक कुमार विश्नोई, राजकीय महाविद्यालय सिरोही राजस्थान से डाॅ. सुभाष विश्नोई, डाॅ. भजनलाल विश्नोई व वर्धमान काॅलेज बिजनौर से डाॅ. जूही अग्रवाल,दिल्ली विश्वविद्यालय के शिवाजी कॉलेज की वाणिज्य विभाग की प्रो किरण चौधरी जी एवं सुप्रिया कामना आदि विषय विशेषज्ञ के रूप उपस्थित रहे।
इस अवसर विशिष्ट अतिथि अंजलि कटारिया (सीओ, धनौरा), गणमान्य अतिथि प्रो. चारु मेहरोत्रा तथा प्रो. सत्यव्रत सिंह रावत आदि उपस्थित रहे।
सत्रों का संचालन डाॅ. नवनीत बिश्नोई,डाॅ. जावेद,डाॅ. मनीष टंडन व प्रो. बीना रूस्तगी ने किया।
समग्र रूप से यह राष्ट्रीय संगोष्ठी गुरु जंभेश्वर के दार्शनिक, पर्यावरणीय एवं मानवीय मूल्यों को समकालीन संदर्भों में समझने और आत्मसात करने का एक सशक्त मंच सिद्ध हुई।
राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य आकर्षण पर्यावरण रक्षक दल द्वारा प्रस्तुत स्लोगन,लोटे से जल पिलाने का प्रतीकात्मक संदेश तथा पर्यावरण संरक्षण हेतु जागरूकता अभियान रहा। इसके अतिरिक्त गृह विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई रंगोली ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

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