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जनसुनवाई में भ्रष्टाचार पर बरसे ऊर्जामंत्री: घूस की बात सुन मौके पर किया फैसला, संविदा कर्मी बर्खास्त; JE-SDO सस्पेंड

ByMoradabadprahari

Jan 23, 2026

लखनऊ/ब्यूरो: उत्तर प्रदेश के विद्युत विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार ने अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई का संदेश दिया है। जनसुनवाई के दौरान भ्रष्टाचार की लाइव शिकायत मिलते ही ऊर्जामंत्री ऐ के शर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों पर तत्काल गाज गिरा दी। मंत्री ने न केवल संविदा कर्मी को नौकरी से हटाने के निर्देश दिए, बल्कि लापरवाही बरतने वाले एसडीओ (SDO) और जेई (JE) को भी सस्पेंड कर दिया।फरियादी का दर्द सुन तल्ख हुए तेवरमिली जानकारी के अनुसार, जनसुनवाई शिविर में एक उपभोक्ता ने सीधे मंत्री से शिकायत की कि उसके काम के बदले विभाग के कर्मचारियों द्वारा घूस (रिश्वत) की मांग की जा रही है। उपभोक्ता ने जब भ्रष्टाचार के सबूत पेश किए, तो मंत्री का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर मौजूद उच्च अधिकारियों को फटकार लगाते हुए तुरंत कार्रवाई का आदेश दिया।मंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में घूसखोरी, लापरवाही और जनता को परेशान करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। जनसुनवाई के दौरान अमरोहा जनपद के नौगांव सादात निवासी शिकायतकर्ता मोहम्मद यूसा, पुत्र कासिम ने विद्युत संयोजन देने के नाम पर रिश्वत मांगने तथा जानबूझकर कार्य में टालमटोल किए जाने की शिकायत मंत्री के समक्ष रखी, जिसे मंत्री श्री शर्मा ने अत्यंत गंभीरता से लिया।मंत्री ए के शर्मा ने मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता से फोन पर वार्ता की और दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए। मंत्री के सख्त तेवरों और जीरो टॉलरेंस नीति का असर यह रहा कि विभाग बिना विलंब किए तुरंत हरकत में आया और देर रात तक कार्रवाई करते हुए दोषियों पर गाज गिराई गई।

इन पर गिरी गाज: संविदा कर्मी: घूसखोरी में मुख्य भूमिका पाए जाने पर संविदा कर्मी की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त (बर्खास्त) कर दी गईं।

जेई (JE) और एसडीओ (SDO): अपने अधीन कर्मचारियों पर नियंत्रण न रखने और भ्रष्टाचार को शह देने के आरोप में संबंधित क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर और सब-डिविजनल ऑफिसर को निलंबित (Suspend) कर दिया गया।

“भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं”: मंत्री की चेतावनीकार्रवाई के बाद ऊर्जामंत्री ने स्पष्ट लहजे में कहा कि विभाग में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, “जनता को परेशान करने वाले और रिश्वत मांगने वाले लोगों की जगह विभाग में नहीं, बल्कि बाहर है। अधिकारी केवल कुर्सी पर न बैठें, बल्कि यह सुनिश्चित करें कि जनता का काम बिना किसी सुविधा शुल्क के हो।”इस त्वरित कार्रवाई से विभाग के अन्य कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है, वहीं आम जनता ने मंत्री के इस ‘ऑन द स्पॉट’ फैसले की सराहना की है।क्या आप इस खबर में विशिष्ट स्थान (जैसे जिला या शहर) या मंत्री का नाम शामिल करवाना चाहते हैं? मैं इसे और अधिक सटीक बना सकता हूँ।

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