नक्शा अप्रूव का बोर्ड लगाकर भोली भाली जनता को देते हैं धोखा
नियमों की धज्जियां सील परिसर में प्रवेश करना ही दंडनीय अपराध है
फर्जी या अधूरी जानकारी वाले बोर्ड लगाकर जनता को लूटा जा रहा है।

मुरादाबाद।
पीतल नगरी में अवैध निर्माण और नियमों को ताक पर रखकर काम करने वाले बिल्डरों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे सीधे तौर पर मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) को चुनौती दे रहे हैं। ताज़ा मामलों में यह सामने आया है कि प्राधिकरण द्वारा सील किए गए परिसरों को बिल्डर न केवल अवैध रूप से खुलवा रहे हैं, बल्कि ‘नक्शा पास’ होने का फर्जी बोर्ड लगाकर विभाग और जनता दोनों को गुमराह कर रहे हैं।
कुछ परिसरों पर प्राधिकरण द्वारा सील लगाई गई थी पर अब इनकी सील तोड़कर निर्माण कार्य जारी है,
सूत्रों के अनुसार, शहर के कई इलाकों में MDA ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जिन परिसरों को सील किया था, वहां अब चोरी-छिपे या सरेआम निर्माण कार्य फिर से शुरू कर दिया गया है। बिल्डर, प्राधिकरण की सील की गरिमा को ताक पर रखकर, नियम विरुद्ध तरीके से परिसर के अंदर काम करवा रहे हैं। यहां तक कि
’नक्शा अप्रूव्ड’ के बोर्ड का खेल भी खेला जा रहा है,
बिल्डरों ने प्राधिकरण की कार्रवाई से बचने के लिए एक नया पैंतरा अपनाया है। निर्माणाधीन साइट्स के बाहर “नक्शा स्वीकृत” के बड़े-बड़े बोर्ड लगा दिए गए हैं, और जब
हकीकत में इन बोर्ड्स की पड़ताल की जाती है, तो पता चलता है कि या तो नक्शा अभी प्रक्रिया में है या फिर जिस निर्माण के लिए नक्शा लिया गया था, उससे कहीं ज्यादा और अलग निर्माण किया जा रहा है।
यह बोर्ड न केवल प्राधिकरण की टीम को भ्रमित करने के लिए हैं, बल्कि उन मासूम खरीदारों को फंसाने के लिए भी हैं जो ‘अप्रूव्ड’ समझकर इन अवैध प्रॉपर्टीज में निवेश कर देते हैं। यह तो सरासर धोखा देने वाली बात है
बड़ा सवाल यह उठता है कि प्रवर्तन दल (Enforcement Wing) की नाक के नीचे सील बंद इमारतों में ताले कैसे खुल रहे हैं? क्या विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत है या फिर बिल्डरों को प्रशासन का कोई डर नहीं रह गया है?
”मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को धोखे में रखकर किए जा रहे ये निर्माण न केवल शहर के मास्टर प्लान को बिगाड़ रहे हैं, बल्कि भविष्य में किसी बड़े हादसे या कानूनी पचड़े का सबब भी बन सकते हैं।”
सील परिसर में प्रवेश करना और सील खोलना एक दंडनीय अपराध है।
फर्जी या अधूरी जानकारी वाले बोर्ड लगाकर जनता को लूटा जा रहा है
और बिना नक्शा पास कराए निर्माण से सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लग रहा है।
अब देखना यह होगा कि MDA के आला अधिकारी इन ‘धोखेबाज’ बिल्डरों पर क्या कड़ा एक्शन लेते हैं या फिर कागजों में सीलिंग की कार्रवाई ऐसे ही चलती रहेगी।
