भ्रष्टाचार की आशंका आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिवहन विभाग के ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटरों (ATS) की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है
माना जा रहा है कि सीएम की इस नाराजगी के बाद परिवहन विभाग में बड़े स्तर पर फेरबदल हो सकता है और कई जिलों के आरटीओ (RTO) कार्यालयों पर गाज गिर सकती
लखनऊ:
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिवहन विभाग के ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटरों (ATS) में व्याप्त भारी अनियमितताओं पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। मुख्यमंत्री ने विभाग के उच्चाधिकारियों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट कहा कि व्यवस्था सुधारने के लिए उठाए गए कदम अब खुद अव्यवस्था का कारण बन रहे हैं।
”सुधारने की बजाय बिगड़ रही व्यवस्था”
मुख्यमंत्री ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में वाहनों की फिटनेस जांच को पारदर्शी बनाने के लिए ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटरों की शुरुआत की गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। उन्होंने कहा, “व्यवस्था सुधारने की बजाय और अधिक बिगड़ती जा रही है, जो कतई स्वीकार्य नहीं है।”
ठेके पर चल रहे सेंटरों में ‘अंधेरगर्दी’ मची है
खबरों के मुताबिक, पीपीपी मॉडल या निजी ठेके पर दिए गए इन टेस्टिंग सेंटरों में बड़े पैमाने पर धांधली की शिकायतें मिल रही हैं। मुख्य बिंदु जिन पर सीएम ने नाराजगी जताई है
मानकों को ताक पर रखकर वाहनों को पास या फेल किया जा रहा है।
आरोप है कि परिवहन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इन सेंटरों की मॉनिटरिंग करने के बजाय आंखें मूंदे बैठे हैं।
: ऑटोमेटिक प्रणाली होने के बावजूद मैनुअल हस्तक्षेप और अवैध वसूली की शिकायतों ने सरकार की छवि पर सवाल खड़े किए हैं।
अधिकारियों को कड़ी चेतावनी
मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनकी शिथिलता के कारण ही ठेका संचालकों के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि:
सभी टेस्टिंग सेंटरों की तत्काल विस्तृत जांच की जाए।
दोषी पाए जाने वाले सेंटरों के लाइसेंस निरस्त किए जाएं।
लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
