
मुरादाबाद।
कुमार तनय वैश्य समाज के प्रतिनिधिमंडल द्वारा भारत के प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री के नाम एक ज्ञापन जिला प्रशासन मुरादाबाद के माध्यम से सौंपा गया। यह ज्ञापन हाल ही में तमिलनाडु में भगवान कार्तिकेय जी के मंदिर में दीपोत्सव एवं पूजा-अर्चना के अधिकार से जुड़े प्रकरण तथा उससे संबंधित न्यायिक निर्णय के समर्थन में दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार है और किसी भी समुदाय को अपनी आस्था के अनुसार पूजा करने से रोका जाना न्यायसंगत नहीं है। साथ ही, न्यायपालिका द्वारा दिए गए संवैधानिक निर्णयों पर दबाव बनाने अथवा न्यायाधीशों के विरुद्ध अनुचित कार्रवाई की मांग को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया गया।
समाज के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता, संवैधानिक मूल्यों एवं धार्मिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि देश में सौहार्द, विश्वास और कानून का राज बना रहे।
क्या है मामला – मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने आदेश दिया था कि मंदिर के अधिकारियों को पहाड़ी पर स्थित एक प्राचीन पत्थर के स्तंभ, जिसे ‘दीपथून’ कहा जाता है, पर दीप प्रज्वलित करने की अनुमति दी जाए। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और दरगाह समिति की आपत्तियों का हवाला देते हुए शुरुआत में इस आदेश का पालन नहीं किया,
इस मामले में न्यायपालिका और सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है, जिसमें अदालत ने सरकारी अधिकारियों द्वारा “अदालत की अवमानना” का संज्ञान लिया है।
कुमार तनय वैश्य समाज के प्रतिनिधिमंडल सरकार की विरोधाभासी नीति का विरोध किया है
इस अवसर पर प्रमुख रूप से गोविंद गुप्ता,पराग गुप्ता, विनय गुप्ता, सचिन गुप्ता, अतुल गुप्ता, आशीष गुप्ता, निखिल गुप्ता सहित समाज के अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।
सभी उपस्थित सदस्यों ने एक स्वर में संविधान, न्याय और धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
