
मुरादाबाद, 20 सितंबर 2026:
उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद में संभल के कुख्यात 100 करोड़ रुपये के बीमा घोटाले की तर्ज पर ‘मर्डर फॉर क्लेम’ (बीमा राशि हड़पने के लिए हत्या) की आशंका का एक और बेहद गंभीर व संदिग्ध मामला सामने आया है। इस बार ₹8.90 करोड़ की भारी-भरकम बीमा राशि को ठिकाने लगाने या क्लेम करने की नीयत से रची गई एक खूनी साजिश का अंदेशा जताया जा रहा है, जिसकी पुलिस और बीमा कंपनियों द्वारा गहनता से जांच की जा रही है।
किराये का मकान, हाल ही में GST रजिस्ट्रेशन और रहस्यमयी मौत
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह संदिग्ध मामला मृतक सलाउद्दीन से जुड़ा हुआ है, जो शहर में एक किराये के मकान में रहता था। पुलिस और बीमा कंपनियों की शुरुआती तफ्तीश में कई चौंकाने वाले और संदेहास्पद तथ्य सामने आए हैं:
- करोड़ों का बीमा और अनजान परिवार: सलाउद्दीन के नाम पर ₹8.90 करोड़ का भारी-भरकम बीमा कराया गया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उसकी पत्नी नगमा को भी अपने पति के नाम पर कराई गई इतनी बड़ी बीमा पॉलिसियों की कोई भनक नहीं थी।
- दस्तावेजों में हेराफेरी का शक: जांच में पता चला है कि वर्ष 2019 में बने मृतक के पहले पैन कार्ड पर हस्ताक्षर की जगह अंगूठे का निशान था, जबकि बाद में दोबारा बनवाए गए पैन कार्ड पर हस्ताक्षर किए गए थे। बीमा कंपनियों को सौंपे गए दस्तावेजों में इन हस्ताक्षरों के मिलान की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
- अचानक GST रजिस्ट्रेशन: सलाउद्दीन ने इतनी बड़ी बीमा पॉलिसियां लेने से कुछ ही दिन पहले अचानक एक जीएसटी (GST) पंजीकरण कराया था, जिसे बीमा का आधार मजबूत करने की साजिश का हिस्सा माना जा रहा है।
संभल के ‘100 करोड़ के बीमा सिंडिकेट’ से जुड़ रहे हैं तार
गौरतलब है कि पड़ोसी जिले संभल में बदायूं और दिल्ली के रहने वाले कई लोगों (दरियाब, संजय, अमन और सलीम) की हत्या कर उसे महज़ एक ‘सड़क हादसा’ दिखाया गया था। उस मामले की परतें खुलने पर करीब ₹100 करोड़ के बीमा फर्जीवाड़े और हत्या के एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ था। मुरादाबाद में सलाउद्दीन की इस संदेहास्पद मौत का पैटर्न भी हूबहू संभल और कुंदरकी में पहले आ चुके बीमा मर्डर केस (जैसे अनिकेत शर्मा हत्याकांड) से मेल खा रहा है।
जांच के मुख्य बिंदु
वर्तमान में पुलिस और संबंधित बीमा कंपनियां (जैसे टाटा एआईजी) इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि:
- क्या सलाउद्दीन की मौत सामान्य या प्राकृतिक थी, अथवा इसके पीछे किसी गिरोह या अपनों का हाथ है?
- पॉलिसी के प्रीमियम की रकम का भुगतान कौन और किस खाते से कर रहा था?
- क्या इस पूरे खेल के पीछे भी किसी अधिवक्ता या शातिर बीमा एजेंट का सिंडिकेट सक्रिय है?
मुरादाबाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस पूरे मामले में जल्द ही बड़ा खुलासा कर सकती हैं।
