नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है कि भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसियां आरटीआई के दायरे में
सुप्रीम कोर्ट का फैसला भ्रष्टाचार जांच आरटीआई
नई दिल्ली , हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 15 जून 2026 को स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट (SPE) बनाम कामता प्रसाद मिश्रा और अन्य (क्रिमिनल अपील नंबर 3743/2024) मामले में एक ऐतिहासिक निर्णय दिया है। यह फैसला सूचना के अधिकार (RTI) और प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम है। क्या था पूरा मामला? कटनी में टाउन इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत कामता प्रसाद मिश्रा पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एक ट्रैप केस दर्ज किया गया था। उन्होंने RTI अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के तहत अपने खिलाफ अभियोजन (prosecution) की स्वीकृति दिए जाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी थी। मध्य प्रदेश की स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट (SPE) ने जानकारी देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की 25 अगस्त 2011 की अधिसूचना के अनुसार उन्हें RTI की धारा 24(4) के तहत “खुफिया और सुरक्षा संगठन” के रूप में इस अधिनियम से छूट प्राप्त है। SPE ने यह भी तर्क दिया कि RTI अधिनियम की धारा 8(1)(h) के तहत इस जानकारी के खुलासे से जांच प्रक्रिया बाधित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट का कानूनी विश्लेषण: न्यायालय के समक्ष मुख्य सवाल यह था कि क्या SPE को RTI अधिनियम की धारा 24(4) के तहत “खुफिया और सुरक्षा (Intelligence and Security) संगठन” माना जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी प्रावधानों का विश्लेषण करते हुए पाया कि SPE का क्षेत्राधिकार सीमित है और इसका मुख्य कार्य भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 420 और अध्याय XVIII के तहत दर्ज भ्रष्टाचार व आर्थिक अपराधों की जांच करना है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चूंकि SPE का कार्य ‘खुफिया’ और ‘सुरक्षा’ से संबंधित नहीं है, इसलिए यह RTI अधिनियम की धारा 24(4) के तहत छूट पाने का हकदार नहीं है। अंतिम निर्णय (Final Verdict): सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की 25 अगस्त 2011 की उस अधिसूचना को अवैध (bad in law) मानते हुए रद्द कर दिया, जो SPE को RTI के दायरे से पूरी तरह बाहर रखती थी। कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें कामता प्रसाद मिश्रा को मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल SPE पर लागू होगा, राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो पर इसका प्रभाव अभी जांचा नहीं गया है। इस प्रकार, न्यायालय ने SPE की क्रिमिनल अपील को खारिज कर दिया।
यह आदेश स्पष्ट करता है कि राज्य सरकारें भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसियों को मनमाने ढंग से ‘खुफिया और सुरक्षा संगठन’ का दर्जा देकर सूचना के अधिकार (RTI) से नहीं बचा सकती हैं।