भविष्य की तैयारी: आगे चलकर गांवों को अपने विकास के लिए खुद होना होगा आत्मनिर्भर
गांवों में बनेगी ‘ग्राम कुल’ समिति, हर शुक्रवार 2 सुदूर गांवों का होगा निरीक्षण;

ग्रामीणों ने ली सप्ताह में 2 घंटे श्रमदान की शपथ कचरे से बनेगी सड़क: ब्लॉक स्तर पर कटेगा प्लास्टिक का कचरा, पीडब्ल्यूडी सड़क बनाने में करेगा इस्तेमाल
मुरादाबाद, 18 मई। गांवों को साफ-सुथरा, आदर्श और विवाद-मुक्त बनाने के लिए मुरादाबाद प्रशासन ने एक नई और आसान पहल शुरू की है। प्रशासन का मानना है कि केवल सरकारी सफाई कर्मियों के भरोसे पूरे गांव की सफाई मुमकिन नहीं है, इसके लिए गांव वालों का साथ बहुत जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए ‘कचरे से कंचन’ (वेस्ट टू वेल्थ) की मुहिम शुरू की गई है, जिसके तहत घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए हर परिवार से रोज़ाना मात्र 1 रुपये (यानी महीने के 30 रुपये) का सहयोग मांगा गया है।*भविष्य में आत्मनिर्भर बनेंगे गांव, इसलिए उठाया यह कदम*आगे चलकर सरकार की योजना है कि हर गांव अपने विकास कार्यों के लिए खुद आत्मनिर्भर बने। भविष्य में गांवों को सरकारी ग्रांट तभी मिलेगी, जब ग्राम पंचायतें अपनी तरफ से भी कुछ कमाई (राजस्व) करेंगी।जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) आलोक शर्मा के मुताबिक, आने वाले समय में जब यह नियम लागू होगा, तो गांव वालों पर अचानक 50 या 100 रुपये महीने का बोझ न पड़े, इसलिए अभी से यह 1 रुपये रोज़ का आसान और व्यावहारिक रास्ता निकाला गया है। इस 1 रुपये के सहयोग से ई-रिक्शा के जरिए घर-घर से कूड़ा उठाया जाएगा और गांव के कचरा निस्तारण केंद्रों को सुचारू रूप से चलाया जाएगा।*हर शुक्रवार होगा निरीक्षण, बनेगी ‘ग्राम कुल’ समिति*जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया के निर्देश पर अब हर शुक्रवार को ब्लॉक की दो ग्राम पंचायतों का सुबह और शाम निरीक्षण किया जाएगा। प्रशासन का सबसे ज्यादा फोकस उन गांवों पर है जो विकास से कटे हुए हैं। गांव के विकास के लिए एक नई ‘ग्राम कुल’ समिति भी बनाई जा रही है। इसमें पंचायत सचिव, लेखपाल, पंचायत सहायक, रोजगार सेवक, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं (जैसे बैंक सखी) के साथ-साथ गांव के बुजुर्गों और सम्मानित लोगों को भी शामिल किया जाएगा। प्रधानमंत्री के आह्वान पर गांव वालों को हफ्ते में कम से कम 2 घंटे साफ-सफाई के लिए ‘श्रमदान’ करने की शपथ भी दिलाई गई है।*कूड़े के प्लास्टिक से बनेंगी सड़कें, खुद रखे जाएंगे सफाई कर्मी*कचरे से कमाई का एक बेहतरीन मॉडल भी तैयार किया गया है। गांवों से निकलने वाले कचरे में से प्लास्टिक, कांच और ई-कचरे को अलग किया जाएगा। ब्लॉक स्तर पर मशीनें लगाई जा रही हैं, जहां प्लास्टिक के कचरे को काटा जाएगा और फिर लोक निर्माण विभाग इस प्लास्टिक का इस्तेमाल सड़क बनाने में करेगा।चूंकि सरकार की तरफ से नए सफाई कर्मियों की भर्ती का कोई आदेश नहीं है, इसलिए कई बड़ी पंचायतें इसी 1 रुपये के सहयोग राशि से 30-35 कर्मचारियों को अपने स्तर पर काम पर रख रही हैं, ताकि गांव चकाचक रहें।*जबदी नदी का होगा जीर्णोद्धार, तालाबों की सफाई गांव वालों के जिम्मे*अधिकारियों के गांव दौरे के दौरान कई पुरानी समस्याओं का भी हल निकाला गया। बाढ़ का खतरा बनने वाली गांव से सटी ‘जबदी नदी’ को फिर से जीवित (जीर्णोद्धार) करने के लिए रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा रही है, ताकि पानी का बहाव सही रहे। इसके अलावा, जिलाधिकारी ने साफ कहा कि अमृत सरोवरों (तालाबों) को सरकार बनवा सकती है, लेकिन उनकी देखरेख और सफाई की जिम्मेदारी गांव वालों की ही है। वहीं, जल निगम द्वारा बीच में छोड़ी गई पानी की पाइपलाइनों और खुदी पड़ी सड़कों पर प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि बजट आते ही काम फिर से शुरू कर दिया जाएगा।
