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Moradabad Prahari

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योगशाला के नाम पर ‘अवैध जिम’ का खेल: नियमों को ताक पर रख चल रहे हजारों फिटनेस सेंटर प्रशासन मौन क्यों ?

ByMoradabadprahari

Apr 23, 2026

फिजियोथेरेपी सेंटर की आड़ में भी हो रहा व्यावसायिक संचालन; जिन्हें कोई जानकारी नहीं है वह भी जिम खोल कर बैठे हैं बिना मानक फल-फूल रहा अवैध कारोबार


​मुरादाबाद। पीतलनगरी में इन दिनों स्वास्थ्य के नाम पर खिलवाड़ का बड़ा खेल चल रहा है। शहर की गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक हजारों की तादाद में अवैध बॉडी फिटनेस सेंटर और जिम कुकुरमुत्ते की तरह उग आए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कार्रवाई से बचने के लिए कई केंद्रों का नाम ‘योगशाला‘ रख दिया गया है, जबकि भीतर भारी-भरकम मशीनों के जरिए जिम का संचालन हो रहा है।
​फिजियोथेरेपी के नाम पर ‘मसल बिल्डिंग’
​जांच में यह भी सामने आया है कि कई केंद्रों को ‘फिजियोथेरेपी क्लीनिक ‘ के तौर पर पंजीकृत कराया गया है या उस नाम का बोर्ड लगाया गया है, लेकिन वहां पेशेवर चिकित्सकीय परामर्श के बजाय बॉडी बिल्डिंग और वेट ट्रेनिंग कराई जा रही है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उन मरीजों के साथ भी धोखा है जो फिजियोथेरेपी की तलाश में वहां पहुंचते हैं।
​न मानक, न सुरक्षा: दांव पर युवाओं की सेहत
​शहर में चल रहे इन हजारों अवैध सेंटरों में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की जा रही है:
​ट्रेनर की कमी: अधिकांश जिम में कोई प्रमाणित (Certified) ट्रेनर नहीं है। अधकचरे ज्ञान के साथ युवाओं को हैवी वर्कआउट कराया जा रहा है।
​अवैध सप्लीमेंट का जाल: कई केंद्रों पर बिना डॉक्टरी सलाह के स्टेरॉयड और प्रतिबंधित सप्लीमेंट बेचे जाने की भी चर्चाएं हैं।
​अग्निशमन और स्थान का अभाव: छोटे-छोटे कमरों और बेसमेंट में बिना वेंटिलेशन और फायर एनओसी (Fire NOC) के ये सेंटर चल रहे हैं, जो किसी भी दिन बड़े हादसे को दावत दे सकते हैं।
​प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
​हैरानी की बात यह है कि यह सब जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की नाक के नीचे हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध रूप से संचालित इन केंद्रों की जानकारी होने के बावजूद जिम्मेदार विभाग मौन साधे हुए हैं। कोई ठोस कार्यवाही न होना प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।
​”क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? या फिर इन अवैध संचालकों को सफेदपोशों का संरक्षण प्राप्त है? शहर के युवाओं के भविष्य और सेहत से जुड़े इस मुद्दे पर अब ठोस एक्शन की दरकार है।”

​नाम का सहारा: रजिस्ट्रेशन से बचने के लिए ‘योगशाला’ नाम का किया जा रहा दुरुपयोग।


​टैक्स की चोरी: बिना व्यावसायिक पंजीकरण के चल रहे इन सेंटरों से सरकार को लाखों के राजस्व का चूना।


​बढ़ते खतरे: बिना विशेषज्ञ की देखरेख में जिम करने से युवाओं में हार्ट अटैक और इंजरी के मामले बढ़े।

अब बड़ा सवाल यह है प्रशासन कब इनकी छानबीन करेगा और कब इन पर कार्यवाही होनी सुनिश्चित होगी?

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