
मुरादाबाद कांठ, वीर सेना द्वारा चैत्र शुक्ल वर्ष प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 वें हिन्दू नववर्ष के उपलक्ष्य में प्रातः महाराणा प्रताप वाटिका बिजनौर में पूरे विधि विधान से हवन पूजन का कार्यकम किया गया,तत्पश्चात वीर सेना के द्वारा राजपूत धर्मशाला,भरत विहार कॉलोनी,बिजनौर में श्री शिवकुमार राजपूत जी (अध्यक्ष, आर्यावर्त रवा राजपूत एकता सेवा समिति) की अध्यक्षता एवं विनीत राजपूत जी(अध्यक्ष, रवा राजपूत संघ) के संचालन में हिंदू नववर्ष के विशाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में हरिद्वार से पधारे अध्यक्ष तीर्थ सेवा न्यास तीर्थाचार्य रामविशाल दास महाराज एवं संस्थापक शाश्वत प्रवाह धर्म प्रचार प्रसार संघ संत शाश्वतानंद सरस्वती महाराज ने एकता के प्रतीक छत्रपति शिवाजी महाराज, शक्ति की प्रतीक मां दुर्गा एवं स्वाभिमान के प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्प अर्पित किए और कार्यक्रम का शुभारंभ किया।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारें कुलदीप आचार्य (वैदिक अध्यात्मिक मिशन मानव कल्याण ट्रस्ट), दीपक सोम (राष्ट्रीय अध्यक्ष,भारतीय किसान यूनियन सेवक), प्रदीप चौहान(राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन जनशक्ति), नरपाल चौधरी (राष्ट्रीय संगठन मंत्री,भारतीय किसान यूनियन जनशक्ति), महेंद्र सिंह जी(अध्यक्ष,क्षत्रिय सभा समिति बिजनौर), हरपाल सिंह जी(प्रधानाचार्य), सिंधुराज (जिला गौ रक्षा प्रमुख,विश्व हिंदू परिषद), वीर सिंह (जिलाध्यक्ष,शिव सेना),कविता राणा (प्रदेश भारतीय किसान यूनियन जनशक्ति) ने अपने अपने विचारों से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और सनातन को मजबूती प्रदान करने के लिए अपने अपने विचार रख जनपद के तमाम सनातनियों को एक अत्यंत सुंदर संदेश दिया।गत वर्षों से अनुभव किया गया है कि समाज अपनी संस्कृति का त्याग कर,पाश्चात्कालीन संस्कृति को अपनाता जा रहा है और कैलेंडर वर्ष के प्रारंभ में उत्सव मना कर नए कैलेंडर वर्ष की शुरुआत करता है। जिसे कई वर्षों से देख रहे वीर सेना के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर रसिक चौहान जी ने बदलने का प्रयास किया और कहा कि हमें अपनी संस्कृति के अनुसार हिंदू नववर्ष मनाना चाहिए।आज भी सभी त्यौहार, रिति रिवाज और विवाह जन्मदिवस जैसे संस्कार के आयोजन तिथि के अनुसार होते है तो नव वर्ष कैलेंडर देखकर क्यों। हिंदू नववर्ष का आयोजन भी तिथि के अनुसार ही होना चाहिए जो कि चैत्र शुक्ल वर्ष प्रतिपदा विक्रम संवत के अनुसार हर वर्ष आता है। अपने नए संगठन वीर सेना के माध्यम से जनपद बिजनौर से इस परंपरा को प्रारंभ कर एक अच्छा संदेश समाज को दिया गया है। इस दौरान तीर्थाचार्य रामविशाल दास महाराज जी के करकमलों द्वारा आज वीर सेना की विधिवत घोषणा की गई और समस्त संत समाज की ओर महाराज जी ने पूर्ण रूप से वीर सेना को समर्थन देते हुए कहा कि समस्त संत समाज वीर सेना के साथ जो कि सनातन को एकजुट करने का कार्य कर रही हैं। वीर सेना पूरी तरह से एक अराजनैतिक संगठन है। वीर सेना का गठन सनातन और भारतीय संस्कृति को मजबूत करने के लिए किया गया है इसके संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर रसिक चौहान है। कुंवर रसिक चौहान ने धरातल पर सनातन एवं राष्ट्र हित में अनेकों सामाजिक कार्य किए है, जिनमें नारी रक्षा,गौ रक्षा, किसान और मजदूर के हित के लिए,महापुरुषों की जयंती का आयोजन आदि प्रमुख है।कुंवर रसिक चौहान ने बताया की समाज एक उम्मीद के साथ हमसे जुड़ता है और यह हमारा दायित्व बनता है कि अपने सभी कार्यकर्ताओं को हमेशा राष्ट्रहित और सनातन के लिए प्रेरित करते रहें और समाज को एकजुट करने का प्रयास करते रहे।आगामी समय मे वीर सेना किसी भी राजनैतिक पार्टी के लिए कार्य नहीं करेगी। वीर सेना सदैव सनातन को मजबूती के लिए,नारी रक्षा के लिए,किसान और मजदूर के हित के लिए, साधु संतों के लिए और राष्ट्रहित के लिए कार्य करती रहेगी।राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर रसिक चौहान के अनुसार सभी कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहकर निस्वार्थ भाव से कार्य करना होगा। संख्याबल चाहे कम ही हो परन्तु जो सच्चे सनातनी और सिर्फ सनातन के कार्य करना चाहते है,उन्हीं सनातनी भाइयों को वीर सेना में स्थान दिया जायेगा।वीर सेना प्रमुखता से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड,हरियाणा,राजस्थान, दिल्ली एवं तमिलनाडु में कार्य करेगी।वीर सेना की वर्तमान राष्ट्रीय कार्यकारणी में उपाध्यक्ष नरेंद्र चौहान , कोषाध्यक्ष राहुल चौहान (अतिरिक्त प्रभार बिजनौर जिला अध्यक्ष), सचिव विशेष राजपूत , आईटी सेल प्रभारी मोहित कश्यप एवं युवा जिला अध्यक्ष बिजनौर रजत राजपूत जी एवं चंचल राजपूत जी कार्यकारणी सदस्य के नेतृत्व में कार्यकारणी का गठन किया जायेगा।।
