
“चढ़ चेतक पर तलवार उठा, रखता था महा-प्रतापी मान।
राणा की हुंकार से ही,कांप उठता था सारा आसमान। “
MORADABAD ,लोकनायक क्षत्रिय कुलभूषण वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी के वार्षिक जन्मोत्सव समारोह कार्यक्रम को कांठ थाना क्षेत्र के ग्राम शेरपुर में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया।सर्वप्रथम आज दोपहर तीन बजे क्षत्रिय समाज समिति शेरपुर द्वारा समाज की एकता और शौर्य के प्रतीक महाराणा प्रताप जी की जयंती पर एक विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया गया। जो कांठ नगर के महाराणा प्रताप द्वार निकट महर्षि दयानंद इंटर कालेज पट्टी मोढ़ा से चलकर ग्राम शेरपुर में सभास्थल पर जाकर संपन्न हुई।जिसमे राजपूती आन-बान और शान के साथ भव्य झांकियां प्रस्तुत की गई थी। कांठ नगर निवासी हिमांशी चौहान और पूर्व विधायक राजेश कुमार चुन्नू ने मुख्य अतिथि के रूप में विशाल शोभायात्रा का संयुक्त रूप से फीता काटकर शुभारंभ किया।शोभायात्रा में शामिल झांकियों में महाराणा प्रताप जी,पृथ्वीराज चौहान,मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचन्द्र जी की झांकियां प्रमुख रूप से रहीं। शोभायात्रा में हजारों युवक महाराणा प्रताप जी के नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे।ग्राम शेरपुर में महाराणा प्रताप जी की जयंती के उपलक्ष्य में इस वर्ष 2025-26 में उत्तीर्ण हुए क्षत्रिय समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं का विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिसमे मुख्य रूप से आर्य चौहान,वंशिका चौहान सहित अनेक मेधावी विद्यार्थियों को मोमेंटो प्रदान करके सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों एवं विशिष्ट जनों का शॉल ओढ़ाकर स्वागत और सत्कार किया गया। कार्यक्रम के अंत में कांठ क्षेत्र के सभी मीडिया बंधुओ को भी सम्मनित किया गया।कार्यक्रम के समापन पर समस्त क्षत्रिय परिवार के लिए भोजन (प्रसाद) की व्यवस्था भी की गई थी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गजेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि अमर राष्ट्रनायक, दृढ़ प्रतिज्ञ और स्वाधीनता के लिए जीवन भर मुगलों से मुकाबला करने वाले साहसिक रणबांकुर महाराणा प्रताप को जंगल-जंगल भटक कर घास की रोटी खाना मंजूर था।लेकिन किसी भी परिस्थिति व प्रलोभन में अकबर की अधीनता को स्वीकार करना कतई मंजूर नहीं था।महाराणा प्रताप कुटनीतिज्ञ, राजनीतिज्ञ,मानसिक व शारीरिक क्षमता में अद्वितीय थे।उस समय दिल्ली में मुगल शासक अकबर का राज था और उसकी अधीनता कई हिन्दू राजा स्वीकार करने के लिए संधि-समझौता कर रहे थे,तो कई राजपूत राजा मुगल औरतों से अपने वैवाहिक संबंध स्थापित करने में लगे थे। लेकिन इनसे अलग महाराणा प्रताप को अकबर की दासता मंजूर नहीं थी।हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध के बाद महाराणा प्रताप परिवार सहित जंगलों में विचरण करते हुए अपनी सेना को संगठित करते रहे। महाराणा प्रताप को मरते दम तक अकबर अधीन करने में असफल ही रहा।विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हिमांशी चौहान ने कहा कि हम एक बार फिर गर्व से याद कर रहे हैं उस महानायक को,जिसने धन,महल और वैभव त्यागकर आत्मसम्मान के लिए जंगलों में जीवन जीते हुए भी मुगलों के सामने कभी घुटने नहीं टेके। मैं ऐसे महापुरुष को सादर नमन करती हूं। हल्दीघाटी का रण केवल युद्ध नहीं,आत्मबल की विजय गाथा थी। महाराणा प्रताप आज भी हमें यह सिखाते हैं कि सच्चा नेता वही है जो अपने राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए कठिन से कठिन परिस्थितियों का भी डटकर सामना करे। कार्यक्रम का संचालन सत्यवान सिंह राजपूत और जितेंद्र सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के आयोजक शिवेंद्र सिंह राजपूत ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर कार्यक्रम के संरक्षक कर्नल वी के सिंह,गजेन्द्र सिंह चौहान,भानु प्रताप सिंह, हिमांशी चौहान, सत्यवान राजपूत,रघुराज सिंह, पुखराज सिंह, कुशलपाल सिंह, आनंद चौहान,पारुल चौहान, सतेंद्र चौहान,सोनू चौहान,डॉ अशोक चौहान,नरेश चौहान, पुष्पेन्द्र चौहान,चमन चौहान, जितेंद्र सिंह चौहान,सूरज सिंह, कैलाश चौहान,अंकुश चौहान, डॉ नेपाल सिंह,प्रमोद चौहान, संजय चौहान,डॉ मुकेश चौहान, पूनम देवी,स्वाति राजपूत आदि उपस्थित रहे।
