
मुरादाबाद। पीतल नगरी में इन दिनों पुलिस की कार्यप्रणाली और सत्ता के रसूख को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। मामला कथित झोलाछाप लक्ष्मण और विधायक पुत्र के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जहां मारपीट की एक घटना ने अब ‘फर्जीवाड़े’ और ‘सेटिंग’ का रूप ले लिया है।
बीते दिनों शहर में तथाकथित झोलाछाप लक्ष्मण के साथ मारपीट की खबर सामने आई थी। शुरुआत में इसे विधायक पुत्र और उनके समर्थकों द्वारा की गई गुंडागर्दी के रूप में पेश किया गया था। हालांकि, पुलिस की जांच और हालिया घटनाक्रम ने इस कहानी को पूरी तरह पलट दिया है। जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे सूत्रों और पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस मामले में निम्नलिखित मुख्य बिंदु सामने आए हैं
आपसी गुटबाजी: मारपीट की घटना किसी बाहरी विवाद के कारण नहीं, बल्कि आपसी गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम थी। लक्ष्मण और दूसरे पक्ष के बीच किसी लेनदेन को लेकर टकराव हुआ था।
विधायक पुत्र को क्लीनचिट ? इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब जांच के बाद विधायक पुत्र को ‘क्लीनचिट’ दे दी गई। पुलिस का मानना है कि घटना के समय उनकी मौजूदगी या संलिप्तता के ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं।
फर्जी तहरीर का खेल: आरोप लग रहे हैं कि लक्ष्मण ने पुलिस को जो तहरीर दी थी, वह पूरी तरह फर्जी और दबाव बनाने वाली थी। इसमें राजनीतिक रसूख का फायदा उठाने और मामले को दूसरा रंग देने की कोशिश की गई थी।
खाकी पर उठते सवाल इस पूरे प्रकरण में ‘खाकी’ यानी पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। स्थानीय लोगों और चर्चाओं की मानें तो शुरुआत में पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की। बाद में दबाव बढ़ा तो तहरीर ली गई, लेकिन अब उसे ‘फर्जी’ करार देकर रफा-दफा किया जा रहा है। चर्चा है कि यह सब एक सोची-समझी रणनीति के तहत हो रहा है ताकि रसूखदार लोगों को बचाया जा सके। तथाकथित लक्ष्मण और उसके क्लीनिक की वैधता पर भी अब स्वास्थ्य विभाग की नजर है, फिलहाल मुरादाबाद पुलिस इस मामले को आपसी विवाद बताकर शांत करने में जुटी है। लेकिन विधायक पुत्र का नाम आने और फिर उन्हें क्लीनचिट मिलने से विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए एक मुद्दा मिल गया है। अब देखना यह होगा कि क्या इस ‘फर्जी खेल’ की परते पूरी तरह खुलेंगी या खाकी की फाइलों में यह मामला भी दब जाएगा।
