



संभल। जनपद में पिछले दो सप्ताह से आग की घटनाओं ने कोहराम मचा रखा है। शॉर्ट सर्किट से लेकर गैस लीकेज तक, आग की लपटें आम जनता की गाढ़ी कमाई और मवेशियों को निगल रही हैं। महज 15 दिनों के भीतर जिले के अलग-अलग हिस्सों में आगजनी की 7 से अधिक बड़ी घटनाएं घट चुकी हैं। इन बढ़ती वारदातों ने के. के ओझा ‘मुख्य अग्निशमन अधिकारी’ (CFO) और फायर ब्रिगेड की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खौफनाक मंजर: एक नजर हालिया घटनाओं पर
जिले में आग के बढ़ते ग्राफ को इन प्रमुख केसों से समझा जा सकता है:
केस 1 (शॉर्ट सर्किट का कहर): एक दो मंजिला मकान में बिजली के शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई। देखते ही देखते घर का कीमती सामान राख के ढेर में तब्दील हो गया।
केस 2 (व्यापारी का नुकसान): संभल स्थित एक परचून की दुकान में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी, जिसमें दुकानदार का हजारों रुपए का माल जलकर स्वाहा हो गया।
केस 3 (हाईवे पर अफरा-तफरी): सड़क हादसे ने भी आग का रूप ले लिया। बाइक से टकराने के बाद एक सीमेंट कैप्सूल धू-धू कर जल उठा, जिसके कारण घंटों तक हाईवे पर चक्का जाम रहा।
केस 4 (चंदौसी में हादसा): मौलागढ़ में गैस सिलेंडर लीकेज के कारण एक घर में आग लग गई। इस हादसे में एक व्यक्ति बुरी तरह झुलस गया, जिसका उपचार चल रहा है।
केस 5 (बेजुबानों पर आफत): एक किसान की पशुशाला आग की भेंट चढ़ गई। इस हृदयविदारक घटना में पांच भैंसों की हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है।
बड़ा सवाल: कहां है फायर सेफ्टी ऑडिट?
लगातार होती इन घटनाओं ने जिला प्रशासन की नींद उड़ा दी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल मुख्य अग्निशमन अधिकारी पर उठ रहा है।
क्या जिले के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और रिहायशी इलाकों में फायर सेफ्टी ऑडिट नियमित रूप से हो रहा है?
शॉर्ट सर्किट की बढ़ती घटनाओं के बीच बिजली विभाग और फायर विभाग में समन्वय की कमी क्यों है?
ग्रामीण क्षेत्रों में आग बुझाने के संसाधनों की पहुंच इतनी धीमी क्यों है?
जनता में भारी रोष
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड को सूचना तो दी जाती है, लेकिन कई बार संकरे रास्तों या देरी से पहुंचने के कारण तब तक सब कुछ जल चुका होता है। जिले में बढ़ती इन घटनाओं ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
संपादकीय टिप्पणी: संभल में आगजनी की ये घटनाएं अब महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा नजर आती हैं। प्रशासन को तुरंत जागरूकता अभियान और सुरक्षा निरीक्षण तेज करने की आवश्यकता है।
