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Moradabad Prahari

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सुप्रीम कोर्ट फैसले के खिलाफ भड़के शिक्षक , क्या अब पुराने शिक्षकों के लिए भी अनिवार्य होगा TET ?

ByMoradabadprahari

Feb 26, 2026

मुरादाबाद ,शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट के 01 सितम्बर, 2025 के निर्णय ने पूरे देश के शिक्षा विभाग में खलबली मचा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब सेवा में बने रहने और पदोन्नति (Promotion) के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।, माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के द्वारा देश के सभी राज्यों में अधिनियम लागू होने की तिथि से पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को भी सेवा में बने रहने अथवा पदोन्नति हेतु टी.ई.टी. उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। जोकि पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के साथ सरासर अन्याय है। फलस्वरूप देश भर के शिक्षक टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले आन्दोलनरत रहकर भारत सरकार से उपरोक्त के सम्बन्ध में अध्यादेश लाकर आर.टी.ई. से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टी.ई.टी. से छूट देने की अपील की गई हैं।उपरोक्त के सम्बन्ध में जनपद के सभी शिक्षकों ने आज दिनांक 26 फरवरी, 2026 को अपराह्न 01 बजे से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना दिया तथा इस सम्बन्ध में जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया जा रहा है।क्या है पूरा मामला?अब तक के नियमों के अनुसार, RTE अधिनियम लागू होने की तिथि (1 अप्रैल, 2010) के बाद नियुक्त होने वाले शिक्षकों के लिए ही TET अनिवार्य था। इससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस पात्रता परीक्षा से छूट प्राप्त थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम आदेश ने इस ‘छूट’ के दायरे को समाप्त कर दिया है, जिससे दशकों से सेवा दे रहे लाखों शिक्षकों के भविष्य पर तलवार लटक गई है।शिक्षकों के आक्रोश के मुख्य कारणकोर्ट के इस निर्णय के बाद देश के विभिन्न राज्यों में शिक्षक संघों ने मोर्चा खोल दिया है। धरने और प्रदर्शनों का दौर जारी है। शिक्षकों का तर्क है कि:अनुभव का अनादर: 20-25 वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षकों का कहना है कि इस उम्र में फिर से प्रतियोगी परीक्षा देना व्यावहारिक नहीं है।नियमों में बदलाव: शिक्षकों के अनुसार, जिस समय उनकी नियुक्ति हुई थी, उस समय TET जैसा कोई प्रावधान अस्तित्व में नहीं था।पदोन्नति में बाधा: इस आदेश से वरिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति रुक जाएगी, जिससे उनके करियर और आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

शिक्षा की गुणवत्ता के लिए मानक तय करना आवश्यक है, लेकिन दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अचानक परीक्षा थोपना उनके साथ अन्याय है। हम इसके खिलाफ उग्र आंदोलन करेंगे।” —कपिल सिरोही उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष

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