

“सफेदपोशों की शरण में फर्जी अस्पताल संचालक, मरीजों की जान से खिलवाड़ पर पुलिस का ‘FR’ प्रेम”
मुरादाबाद। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा अवैध अस्पतालों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान से जिले के फर्जी डॉक्टर और अस्पताल संचालकों में हड़कंप मचा है। इस कार्रवाई की जद में आए एक तथाकथित अस्पताल संचालक ‘लक्ष्मण’ ने अब खुद को बचाने के लिए राजनीतिक गलियारों में शरण ले ली है। चौंकाने वाली बात यह है कि दो-दो गंभीर एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बाद भी आरोपी के हौसले बुलंद हैं।

राजनीतिक संरक्षण बना ढाल –
सीएमओ की कार्रवाई से बौखलाए इस संचालक लक्ष्मण ने अब सत्ता और राजनीति के ‘बड़े चेहरों’ के पीछे छिपना शुरू कर दिया है। राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर विभाग और पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि अवैध अस्पताल का धंधा बेखौफ चलता रहे।
ओटी अटेंडेंट से ‘डॉक्टर’ बनने का सफर – सूत्रों के अनुसार, लक्ष्मण नाम का यह व्यक्ति पूर्व में शहर के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में मात्र 11,000 रुपये की मासिक पगार पर ओटी अटेंडेंट का काम करता था। वहां सर्जरी और इलाज की बारीकियां सीखने के बजाय उसने कथित तौर पर अवैध रूप से अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया। आज वह बिना किसी वैध डिग्री के अस्पताल संचालित कर रहा है, जो मासूम मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है।
गंभीर धाराओं में दर्ज हैं मुकदमे, पुलिस की कार्यशैली पर सवाल -अवैध संचालन और जालसाजी को लेकर लक्ष्मण के खिलाफ अब तक दो बार गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता के उलट पुलिस प्रशासन की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। आरोप है कि स्थानीय पुलिस इन मामलों में फाइनल रिपोर्ट (FR) लगाकर आरोपी को क्लीन चिट देने की कोशिश करती रही रही है। कानून के रक्षकों की यह ढुलमुल कार्यप्रणाली चर्चा का विषय बनी हुई है।
स्टाफ के शोषण और अनैतिक संबंधों की चर्चा
अस्पताल के भीतर केवल इलाज का ही फर्जीवाड़ा नहीं है, बल्कि संचालक के चरित्र पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि लक्ष्मण ने अस्पताल की महिला स्टाफ के साथ अनैतिक व्यक्तिगत संबंध बनाए हुए हैं, जिसके जरिए वह अस्पताल के भीतर अपना दबदबा कायम रखता है।
स्थानीय लोगों ने सीएमओ से निष्पक्ष जांच और अस्पताल को सील करने की मांग की है।
