• Thu. May 14th, 2026

Moradabad Prahari

News Paper

भ्रष्ट अफसरशाही से त्रस्त बरेली-बंदायु के ठेकेदार की राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग

ByMoradabadprahari

Jun 23, 2025

ठेकेदार ने लगाई गुहार मैं और मेरा परिवार मानसिक, आर्थिक, सामाजिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। जब भी मैं सत्य के पक्ष में खड़ा हुआ, मुझे दंडित किया गया

नहीं बची न्याय की कोई उम्मीद

लखनऊ,

उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) बरेली व बंदायु में वर्षों से कार्य करने वाले ठेकेदार सतीश चंद्र दीक्षित ने भ्रष्टाचार और माफिया-अफसर गठजोड़ से इतने त्रस्त हो गए कि उन्होंने परिवार समेत राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। सतीश का आरोप है कि उन्होंने जब विभागों में भ्रष्टाचार और टेंडर घोटालों का विरोध किया तो उन्हें प्रताड़ित किया गया, ब्लैकलिस्ट कर दिया गया और झूठे मुकदमों में भी फंसाने की धमकी दी
सतीश दीक्षित ने पत्र में दावा किया है कि ठेकेदार जावेद खान को पिछले 8 वर्षों में विभाग ने लगभग 100 करोड़ से ज्यादा के ठेके मनमानी दरों पर दे दिए, जिनमें से 30 कार्यों की सूची उन्होंने संलग्न की है। टेंडरों में फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग कर अनुचित लाभ लिया गया और जब सतीश ने इस पर आपत्ति जताई तो उन्हें विभागीय कार्रवाई और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

सतीश दीक्षित ने बताया कि उन्होनें शिकायत की तो लोकायुक्त जांच में विभाग के 6 अभियंताओं को 17 आरोपों में दोषी पाया गया। 19 सितंबर 2023 को तीन महीने में कार्रवाई की सिफारिश की गई, मगर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके उलट दीक्षित को काम नहीं मिला और उलटा ठेकेदार जावेद खान द्वारा तीन अलग-अलग मुकदमे बरेली, बदायूं और रामपुर में दर्ज करवा दिए गए।

न्यायालय के आदेशों की भी अनदेखी
दीक्षित ने पत्र में बताया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 27 मई 2025 को कार्रवाई आदेश को निरस्त कर दिया, लेकिन इसके ठीक अगले दिन 28 मई की मनगढ़ंत घटना दर्शाकर दूसरा मुकदमा दर्ज करा दिया गया। इसी तरह 4 जून को एक अन्य मुकदमा भी उनके खिलाफ कराया गया। दीक्षित का कहना है कि यह पूरा तंत्र उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश कर रहा है।

रामपुर में 25 करोड़ का टेंडर भी सवालों में
दीक्षित ने यह भी आरोप लगाया कि रामपुर में सेतु निगम द्वारा 25 करोड़ का टेंडर फर्जी अनुभव के आधार पर जावेद खान को दिया गया, जिससे शासन को नुकसान पहुंचा और गुणवत्ता भी खराब की गई है।

अब जीने की कोई वजह नहीं बची : दीक्षित

अपने पत्र में सतीश चंद्र दीक्षित पुत्र लक्ष्मी नारायण दीक्षित, मो. नेकपुर, निकट पवन बैंकट हाल, डीएम रोड बदायूं (उ.प्र.) ने लिखा कि मैं और मेरा परिवार मानसिक, आर्थिक, सामाजिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। जब भी मैं सत्य के पक्ष में खड़ा हुआ, मुझे दंडित किया गया। अब न्याय की कोई उम्मीद नहीं बची है, कृपया मुझे और मेरे परिवार को राष्ट्रपतित की ओर से इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए।

प्रशासन और सरकार की चुप्पी सवालों में
यह मामला उत्तर प्रदेश में विभागीय पारदर्शिता, ठेकेदारी नियंत्रण और लोकायुक्त सिफारिशों के अनुपालन पर गंभीर सवाल उठाता है। यदि सत्य उजागर करने वाला ही बार-बार दंडित होता है तो शासन व्यवस्था पर जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *