डिजिटल सट्टा: मोबाइल और व्हाट्सएप के जरिए पुलिस की आंखों में झोंकी जा रही धूल।
ठिकाना: नागफनी में ब्यूटी पार्लर के सामने वाला घर बना सट्टेबाजों का अड्डा।
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद के नागफनी और मुगलपुरा थाना क्षेत्रों में मोबाइल फोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन सट्टे (जुए) का अवैध कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है। यह पूरा खेल अब पूरी तरह हाईटेक हो चुका है, जिससे युवा पीढ़ी बर्बादी की कगार पर पहुंच रही है

मुरादाबाद। पीतलनगरी के नागफनी और मुगलपुरा थाना क्षेत्रों में इन दिनों सट्टेबाजी और नशे का कारोबार अपनी जड़ें गहरी कर चुका है। डिजिटल इंडिया के दौर में सट्टेबाजों ने भी खुद को अपडेट कर लिया है। अब गली-मोहल्लों में पर्चियां नहीं काटी जातीं, बल्कि व्हाट्सएप और मोबाइल कॉल के जरिए लाखों का दांव लगाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस अवैध धंधे को स्थानीय पुलिस का कथित संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते बेखौफ सट्टेबाज मासूम लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।
नागफनी: यसिर बेग का ठिकाना बना सट्टे का ‘कंट्रोल रूम’
क्षेत्रीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नागफनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत यसिर बेग (पुत्र नासिर बेग) सट्टेबाजी के नेटवर्क का मुख्य संचालक बताया जा रहा है। इसका ठिकाना डॉ. एस. कुमार चौराहे से आगे, मिर्जा मोबाइल के पास ब्यूटी पार्लर के सामने वाला घर है।
खबर है कि यहीं से यसिर अपने गैंग के साथ मिलकर पूरा नेटवर्क चलाता है। सट्टे के लिए 8859730899 और 9997916288 जैसे मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। व्हाट्सएप पर ही भाव तय होते हैं और हार-जीत का हिसाब भी डिजिटल माध्यमों से हो रहा है।
मुगलपुरा: ‘टीमा’ के जाल में फंस रहे मासूम
सट्टे की यह आग सिर्फ नागफनी तक सीमित नहीं है। मुगलपुरा थाना क्षेत्र का बरबलान इलाका भी इसकी चपेट में है। यहां ‘टीमा’ नामक सट्टेबाज का आतंक है। टीमा न केवल सट्टा खिलवाता है, बल्कि हारने वाले सीधे-सादे और मासूम लोगों को कर्ज के जाल में फंसा लेता है। इसके बाद शुरू होता है वसूली और मानसिक उत्पीड़न का वो दौर, जो कई परिवारों को सड़क पर ले आया है।
चरस की बिक्री और पुलिस की भूमिका पर सवाल
सट्टेबाजी के साथ-साथ इन क्षेत्रों में चरस और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री भी धड़ल्ले से जारी है। स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि इतने पुख्ता ठिकानों और मोबाइल नंबरों की जानकारी होने के बावजूद पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। चर्चा है कि खाकी की ‘शह’ के बिना यह अवैध धंधा इतनी बड़ी मशीनरी के साथ नहीं चल सकता।
अंतरराज्यीय कनेक्शन: इस धंधे के तार दिल्ली, उत्तराखंड और मुंबई की बड़ी सट्टा वेबसाइटों से जुड़े हैं। उदाहरण के लिए, पूर्व में दबोचे गए कुख्यात सट्टा माफिया अजीम पर मुरादाबाद के विभिन्न थानों में करीब 37 मामले दर्ज थे और वह दिल्ली की कंपनी के साथ पार्टनरशिप में काम करता था।
