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up; न जांच , न तहकीकात, सीधे एफआईआर क्यो ? थाने से मांगी आरटीआई , हो गया मुकदमा पंजीकृत , मुख्य सचिव डीजीपी से की शिकायत !

ByMoradabadprahari

Jan 13, 2025

पुलिस के अत्याचार से जूझ रहे आरटीआई कार्यकर्ता

अयोध्या :
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत सूचना मांगना इतना भारी पड़ जाएगा की संजय ने सोचा ही नहीं था ,

प्रप्त सूचना के अनुसार मामला अयोध्या में गोशाई गंज नगर पंचायत के गोशाई गंज थाना का है जहां पर थाना इंचार्ज की सूचना मांगना संजय वर्मा को भारी पड़ गया बताया जाता है कि संजय वर्मा एक सामाजिक व आरटीआई कार्यकर्ता है और पुलिस के अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हैं गोशाई गंज थाने में परशुराम ओझा थाना इंचार्ज व पुलिस की लापरवाही के खिलाफ उन्होंने शिकायतें भी की हैं और थाना अध्यक्ष और सी ओ के विरुद्ध जन सूचना आरटीआई पत्र के माध्यम से महत्वपूर्ण सूचनाऔ की मांग की है और अपील राज्य सूचना आयोग में लंबित है लेकिन कोई यह नहीं कह सकता की कोई जन सूचना अधिकारी सूचना मांगने पर इतना नाराज हो जाए की सूचना मांगने वाले के विरुद्ध एफआईआर पंजीकृत कर दे आईटीआई कार्यकर्ता संजय कुमार वर्मा के द्वारा पुलिस अधीक्षक कार्यालय अयोध्या से कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जन सूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सूचना मांगी गई जिसमें एक साल का ब्योरा मांगा गया इसी तरह क्षेत्र अधिकारी को भी आरटीआई के दायरे में लेते हुए सूचना की मांग की गई जिससे पुलिस विभाग के अधिकारी इतने खफा हुए की संजय कुमार वर्मा के ऊपर एक फर्जी प्रार्थना पत्र पर मुकदमा लगा दिया , न जांच , न तहकीकात, सीधे एफआईआर, और उस मुकदमे को खारिज करने के लिए अब संजय वर्मा इधर-उधर भटक रहे हैं संजय वर्मा ने उक्त एफ आई आर के विरुद्ध डी जी पी मुख्य सचिव को प्रार्थना पत्र दिया है सूत्रों के अनुसार सूचनाऐ इतनी महत्वपूर्ण है कि यदि स्पष्ट सूचनाओं दे दी जाती हैं तो निश्चय ही पुलिस विभाग में खलबली मच जाएगी ।
जबकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए जन सूचना कार्यकर्ताओं को सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए दिशा निर्देश भी दे दिए थे और ऐसे पुलिसकर्मी किस आधार पर आरटीआई कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर पंजीकृत करते हैं यह अत्यंत गंभीर विषय है

अब इस घटनाक्रम पर कितनी निष्पक्ष जांच होती है यह तो समय ही बताएगा लेकिन यह पूरा घटनाक्रम एक बड़ा सवाल छोड़ जाता है क्या वास्तव में आरटीआई मांगना किसी कार्यकर्ता के लिए एक अभिशाप है यह प्रश्न भारत की जनता से पूछना ही होगा

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