
डॉ. संजय निषाद का बड़ा राजनीतिक संदेश—हर बूथ पर 10 नौकरी, हर घर में रोजगार का मिशन

मंडलीय बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन में गरजे निषाद पार्टी अध्यक्ष, कहा—अब समाज सिर्फ वोट बैंक नहीं, अपनी राजनीतिक ताकत पहचाने
मुरादाबाद। मंडलीय बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने समाज की राजनीतिक ताकत को लेकर कार्यकर्ताओं के सामने बड़ा एजेंडा रखा। उन्होंने साफ कहा कि अब समाज को केवल चुनाव के समय वोट देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने वोट की ताकत पहचानकर राजनीतिक हिस्सेदारी और अधिकारों के लिए संगठित होना होगा।
डॉ. संजय निषाद ने कहा कि निषाद पार्टी का मिशन हर बूथ पर समाज के कम से कम 10 लोगों को नौकरी दिलाने की दिशा में काम करना है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना और समाज की सेवा को राजनीतिक ताकत में बदलना है।
“हर विधानसभा में अपनी ताकत पहचानो”
निषाद पार्टी अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं से कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में समाज को अपनी वोट की संख्या और उसकी राजनीतिक ताकत को समझना होगा। जब समाज अपने वोट की कीमत और प्रभाव को पहचानेगा, तभी वह अपने अधिकारों, सम्मान और राजनीतिक भागीदारी की मजबूत आवाज बन सकेगा।
उन्होंने कार्यकर्ताओं को घर-घर पहुंचकर समाज को जागरूक करने और बूथ स्तर पर मजबूत संगठन तैयार करने का संदेश दिया।
हर घर नौकरी—बड़ा राजनीतिक संकल्प
सम्मेलन में रोजगार का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। डॉ. संजय निषाद ने कहा कि समाज के युवाओं को रोजगार और अवसर मिलना जरूरी है। हर घर में नौकरी हो, यही लक्ष्य होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज सुख, समृद्धि और सम्मान चाहता है तो उसे अपनी पहचान और राजनीतिक शक्ति को समझना होगा तथा संगठन को मजबूत करना होगा।
तुरैहा समाज को उसका हक मिलना चाहिए
डॉ. संजय निषाद ने तुरैहा समाज के अधिकारों की बात करते हुए कहा कि उसे उसका हक मिलना चाहिए। उन्होंने समाज के सभी वर्गों को राजनीतिक रूप से जागरूक और संगठित करने पर जोर दिया।
बूथ बनेगा बदलाव का केंद्र
सम्मेलन से निकला सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि आने वाले समय में बूथ स्तर का संगठन ही राजनीतिक ताकत का आधार बनेगा। कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई कि वे समाज के बीच जाएं, लोगों की समस्याएं उठाएं और संगठन को मजबूत करें।
संपादकीय टिप्पणी | सवाल सिर्फ वादे का नहीं, परिणाम का है
हर बूथ पर 10 नौकरी और हर घर में रोजगार—यह नारा जितना बड़ा है, चुनौती उससे कहीं बड़ी है। समाज के युवा अब भाषण नहीं, रोजगार और अवसर चाहते हैं। राजनीतिक संगठन यदि इस संकल्प को जमीन पर उतारने में सफल होता है तो इसका असर केवल संगठन की राजनीति पर नहीं, बल्कि समाज के भविष्य पर भी पड़ेगा।
अब निगाह इस बात पर होगी कि सम्मेलन में उठी आवाज बूथ से निकलकर रोजगार और अधिकार की वास्तविक लड़ाई में कितनी दूर तक पहुंचती है।
