
कांवड़ यात्रा के दौरान सावन की श्रद्धा और सेवा का नजीबाबाद में अनोखा संगम
सावन मास की पावन कांवड़ यात्रा के दौरान नजीबाबाद में श्रद्धा, सेवा और संस्कार का अनोखा संगम देखने को मिला.
हरिद्वार के हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़ियों के एक जत्थे ने अपनी बुजुर्ग दादी मां को कांवड़ में बैठाकर यात्रा कराई।
यह दृश्य प्रेरणादायक था, क्योंकि कांवड़ यात्रा में बुजुर्गों की भूमिका भी प्रमुख दिखी.
जिसे देखकर हर कोई भावुक हो गया।
बृजघाट से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम आलमनगर निवासी सोनू सिंह अपने साथियों के साथ हरिद्वार पहुंचे, जहां उन्होंने मां गंगा के दर्शन कर अपनी दादी को भी पवित्र यात्रा का हिस्सा बनाया।
इसके बाद हर की पौड़ी से गंगाजल भरकर पूरा जत्था नजीबाबाद होते हुए अपने गांव के लिए रवाना हुआ।
सोमवार सुबह करीब 9 बजे जैसे ही यह जत्था नजीबाबाद पहुँचा, दादी मां को कांवड़ में विराजमान देखकर लोगों ने उनकी श्रद्धा और सेवा भाव की जमकर सराहना की।
नगरवासियों ने जगह-जगह फूल-मालाओं और पेयजल के साथ कांवड़ियों का स्वागत किया।
कांवड़िया सोनू सिंह ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल गंगाजल लाना ही नहीं, बल्कि अपनी दादी को मां गंगा के दर्शन कराकर उनके आशीर्वाद के साथ यात्रा पूरी करना भी है।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपने माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा, सम्मान और आदर करना चाहिए।
यही सच्ची भक्ति और भारतीय संस्कृति की पहचान है।
श्रद्धा और सेवा का यह अनोखा उदाहरण अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
लोग इसे धर्म के साथ-साथ बुजुर्गों के सम्मान का प्रेरणादायक संदेश मान रहे हैं।
