| न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम सुनवाई के लिए अगली तिथि तय कर दी है,इस मामले में आज न्यायालय में 2 घंटे लगातार बहस चली है , |

ररामपुर / मुरादाबाद:मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण और जुर्माने से जुड़े बहुचर्चित मामले में मुरादाबाद मंडलायुक्त न्यायालय में आज महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता और शासकीय अधिवक्ता के बीच तीखी बहस देखने को मिली। फिलहाल मंडलायुक्त ने यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण पर रोक को बरकरार रखा है और मामले में कोई अंतिम आदेश जारी न करते हुए अगली तारीख नियत कर दी है।
दोनों पक्षों की प्रमुख दलीलें
- यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता का तर्क: जौहर यूनिवर्सिटी पक्ष के अधिवक्ता ने मजबूती से पैरवी करते हुए अदालत के समक्ष तर्क रखा कि जिस समय यूनिवर्सिटी का निर्माण हुआ था, उस समय संबंधित भूमि जिला पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आती थी। उन्होंने कहा कि उस दौरान लागू नियमों के तहत जो जुर्माना लगाने का प्रावधान था, उसी के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
- शासकीय अधिवक्ता का रुख: दूसरी तरफ, मुरादाबाद कमिश्नरी के शासकीय अधिवक्ता ने तर्क का खंडन करते हुए कहा कि जुर्माने का प्रावधान उस समय के हिसाब से अलग था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यूनिवर्सिटी की जमीन और निर्माण कार्य ‘रामपुर विकास प्राधिकरण’ (RDA) के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए पूरी विधिक प्रक्रिया और कार्रवाई रामपुर विकास प्राधिकरण के नियमों के अनुसार ही न्यायसंगत है।
सुनवाई का मुख्य निष्कर्ष ध्वस्तीकरण पर अस्थायी राहत: मंडलायुक्त ने फिलहाल यूनिवर्सिटी प्रशासन को राहत देते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक जारी रखी है।कोई ठोस आदेश नहीं: आज की सुनवाई में पुलिस व संबंधित विभागों की मौजूदगी और दलीलों के बाद कमिश्नर द्वारा कोई अंतिम/ठोस फैसला नहीं सुनाया गया।अगली तारीख तय: न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम सुनवाई के लिए अगली तिथि तय कर दी है, जिस पर आगे की कानूनी बहस होगी।
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