अभिभावकों के बीच सरकारी स्कूलों की छवि सुधरने की एक नई उम्मीद जागी है।

मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश , सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में सुधार और शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) श्रीमती रीतु तोमर पूरी तरह से एक्शन मोड में हैं। स्कूलों का कायाकल्प करने और छात्र-छात्राओं के भविष्य को संवारने के लिए वह लगातार धरातल पर उतरकर स्कूलों का सघन निरीक्षण कर रही हैं।निरीक्षण के दौरान श्रीमती रीतु तोमर ने स्पष्ट कर दिया है कि बच्चों की पढ़ाई के मामले में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नवाचार और छात्र संख्या बढ़ाने पर जोर जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में छात्र एवं छात्राओं की संख्या (नामांकन) को बढ़ाना है। इसके लिए प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों को लगातार प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को पारंपरिक ढर्रे से अलग हटकर कुछ नया सिखाने के लिए ‘नवाचार’ (Innovation) बेहद जरूरी है।
शिक्षक कक्षाओं में नए प्रयोगों और आधुनिक तरीकों से बच्चों को पढ़ाएं, इसके लिए उन्हें लगातार आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
मूलभूत सुविधाओं और सेहत का रखा जाएगा खास ख्याल श्रीमती रीतु तोमर के प्रयासों में केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि बच्चों का स्वास्थ्य भी शीर्ष प्राथमिकता पर है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में आने वाले बच्चों को:शुद्ध और साफ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।उच्च गुणवत्ता (High Quality) का भोजन (मिड-डे मील) मिले, ताकि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर हो सके।
“हमारा प्रयास सिर्फ बच्चों को स्कूल तक लाना नहीं है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतरीन शैक्षणिक माहौल देना है। बच्चों के भविष्य और उनकी पढ़ाई के सिलसिले में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”— श्रीमती रीतु तोमर, जिला विद्यालय निरीक्षक
मुख्य बिंदु: जिस पर रहेगा विशेष ध्यान
सघन निरीक्षण: स्कूलों की व्यवस्था जांचने के लिए औचक निरीक्षण का सिलसिला लगातार जारी रहेगा।
शिक्षकों को प्रोत्साहन: नवाचार आधारित शिक्षा के लिए शिक्षकों को प्रेरित और प्रशिक्षित किया जाएगा।
जीरो टॉलरेंस: पढ़ाई और बच्चों की बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया जाएगा।जिला विद्यालय निरीक्षक के इस सक्रिय रुख से विभाग और शिक्षकों में हड़कंप है, वहीं अभिभावकों के बीच सरकारी स्कूलों की छवि सुधरने की एक नई उम्मीद जागी है।
