
मुरादाबाद
जिले की गौशालाएं काऊ बेस्ड फार्मिंग हब के रूप में होंगी विकसित, कृषि विभाग करेगा नवाचार।
विकास भवन के सभागार में आयोजित विकास कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक में जिला प्रोबेशन अधिकारी चंद्रभूषण की गैर मौजूदगी पर जिलाधिकारी अनुज सिंह ने नाराजगी जताते हुए उन्हें जनपद से रिलीव करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी को निर्देशित किया है, बताया जाता है कि जिला प्रोबेशन अधिकारी चंद्रभूषण की मूल तैनाती जनपद संभल में है और उन्हें शासन द्वारा मुरादाबाद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। विभागीय योजनाओं की समीक्षा के दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी की गैर मौजूदगी पर मुख्य विकास अधिकारी सुश्री मृणाली अविनाश जोशी ने भी नाराजगी जताई तथा कहा कि उन्हें सप्ताह में बृहस्पतिवार, शुक्रवार और शनिवार को जनपद मुरादाबाद में उपस्थित रहकर विभागीय कार्यों के निर्वहन के लिए निर्देशित किया गया था परंतु विभागीय योजनाओं में खराब प्रगति तथा बैठक में उपस्थित न होना अधिकारी की लापरवाही को प्रदर्शित करता है।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने उद्यान विभाग, कृषि रक्षा रसायन, पीएम कुसुम योजना, बीज डीबीटी, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), दुग्ध मूल्य भुगतान, दिव्यांगजन पेंशन, गन्ना मूल्य भुगतान, दिव्यांग जनों को सहायक उपकरण वितरण, आबकारी, ओडीओपी, कन्या विवाह सहायता योजना और आइजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की स्थिति सहित विभिन्न विभागों के योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तार पूर्वक समीक्षा की।
जिलाधिकारी ने उपनिदेशक कृषि और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि वे जनपद की गौशालाओं को काऊ बेस्ड फार्मिंग हब के रूप में विकसित कराएं। जिसके अंतर्गत गौशालाओं में एकत्रित होने वाले गोबर और गोमूत्र से आधुनिक कृषि तकनीक के आधार पर ऐसे उर्वरक उत्पाद तैयार कराएं जो कृषि में रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर हानिरहित जैविक उर्वरक के रूप में प्रयोग में लाए जा सकें।
उन्होंने उप निदेशक कृषि को इस संबंध में निर्देशित करते हुए कहा कि जैविक उर्वरकों को तैयार कराते हुए गौशालाओं के आसपास खेती करने वाले किसानों को भी इसके प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाए ताकि लोग जैविक खेती के तरीकों से जुड़ सकें और गौशालाओं में एकत्रित होने वाले गोबर और गोमूत्र का बेहतर उपयोग हो सके।
जिलाधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत स्तर से विभिन्न प्रकार के कार्य कराए जाने के दौरान वित्तीय नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। ग्राम प्रधान को किसी सरकारी योजना से संबंधित धनराशि को अपने निजी खाते में लेने का अधिकार नहीं है क्योंकि यह कृत्य सरकारी धनराशि का दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।
जिलाधिकारी ने जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी से न्याय पंचायत वार आयोजित कराए गए कैंप के दौरान चिन्हित जरूरतमंद दिव्यांग जनों की स्थिति के बारे में जानकारी ली तथा कहा कि जो सहायक उपकरण दिव्यांग जनों को प्रदान किए जाते हैं उनका प्रयोग करने के तरीकों के बारे में भी जानकारी दी जाए ताकि दिव्यांगजन उन सहायक उपकरणों का बेहतर तरीके से प्रयोग कर सकें।
