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अदालत में जालसाजी: विवेक ठाकुर ने कोर्ट को किया गुमराह; पुरानी अनुमति की आड़ में नई बिल्डिंग में खड़ा किया अवैध कोचिंग ‘स्कॉलर डेन ‘

ByMoradabadprahari

Jun 17, 2026

कोर्ट से ‘कपट’: विवेक ठाकुर की खुली पोल, नई बिल्डिंग की नहीं है अनुमति, पुराना सर्टिफिकेट दिखा कर रहे गुमराह!

मुरादाबाद प्रहरी की एक्सक्लूसिव: पुरानी जगह से कारोबार खत्म, नई जगह कोई अनुमति नहीं; जानिए कैसे विवेक ठाकुर ने कानून की आंखों में झोंकी धूल

जगह बदली पर अनुमति पुरानी, DIOS के नियमों को ठेंगा दिखाकर विवेक ठाकुर चला रहा अवैध कारोबार!

मुरादाबाद। न्याय के मंदिर को गुमराह करने और प्रशासनिक नियमों को ताक पर रखकर कोचिंग संस्थान चलाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, स्कॉलर डेन कोचिंग सेंटर के संचालक विवेक ठाकुर से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुकदमे में आरोपी विवेक ठाकुर पर अदालत के सामने झूठे तथ्य और गुमराह करने वाले दस्तावेज पेश करने के पुख्ता आरोप लगे हैं।मामले की तहकीकात से साफ हुआ है कि विवेक ठाकुर ने अदालत में दावा किया कि उसके पास कोचिंग संचालन की सभी वैध अनुमतियां हैं। लेकिन सच यह है कि जिस अनुमति पत्र (स्वीकृति प्रमाण पत्र) को उसने ढाल बनाया है, वह उस पुरानी जगह का है जहां से वह अपना कारोबार पूरी तरह समेट चुका है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के नियमों के मुताबिक, नई बिल्डिंग में संस्थान शिफ्ट करने से पहले नए सिरे से प्रशासनिक और सुरक्षा मानकों की अनुमति लेना अनिवार्य है, जिसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

नियमों का खुला उल्लंघन और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़

शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के नियमों के अनुसार, किसी भी व्यावसायिक या शैक्षणिक संस्थान को नई बिल्डिंग में स्थानांतरित करने पर अग्निशमन (Fire Safety), भवन की मजबूती (Structural Safety) और छात्र क्षमता के आधार पर जिला विद्यालय निरीक्षक से नई स्वीकृति लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

बड़ा सवाल: अगर नई अनधिकृत बिल्डिंग में कोई अप्रिय घटना या हादसा हो जाता है, तो छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी? पुरानी अनुमति दिखाकर नई जगह पर अवैध रूप से ‘स्कॉलर डेन ‘ खड़ा करना सीधे तौर पर कानून और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

जांच के घेरे में विवेक ठाकुर अदालत को गुमराह करने के इस कृत्य के बाद अब विवेक ठाकुर की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कानूनी जानकारों के मुताबिक, अदालत में गलत या पुराने दस्तावेजों को वर्तमान का बताकर पेश करना ‘कपट और जालसाजी’ (Forgery and Misrepresentation) की श्रेणी में आता है, जिसके लिए कोर्ट कड़ी कार्रवाई कर सकता है।

मुरादाबाद प्रहरी, इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। जिला विद्यालय निरीक्षक और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से इस अवैध संचालन और कोर्ट को गुमराह करने के विषय पर जल्द ही जवाब मांगा जाएगा।रिपोर्ट: योगेश कुमार, संपादक, मुरादाबाद प्रहरी, समाचार पत्र, भारत

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