
मुरादाबाद।नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों के खिलाफ मुरादाबाद कोर्ट ने एक बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है। एडीजे-11मा. घनेंद्र कुमार की अदालत ने चरस तस्करी के मामले में आरोपी शरीफ को दोषी करार देते हुए 12 साल की कैद और एक लाख रुपये के आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में सरकार की ओर से विशेष अभियोजक वैभव अग्रवाल (एडवोकेट) ने दमदार पैरवी की, जिसके चलते आरोपी को अंजाम तक पहुंचाया जा सका।
क्या था पूरा मामला? मामला भोजपुर थाने से जुड़ा है, जहां 6 जुलाई 2018 को तत्कालीन एसआई राकेश कुमार ने लखनपुरी निवासी शरीफ के खिलाफ चरस बरामदगी के बाद गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपी के पास से भारी मात्रा में चरस बरामद की थी, जिसके बाद से ही यह मामला अदालत में विचाराधीन था।
विशेष अभियोजक वैभव अग्रवाल की प्रभावी पैरवी अदालत में सुनवाई के दौरान विशेष अभियोजक वैभव अग्रवाल एडवोकेट ने अभियोजन पक्ष की ओर से अचूक दलीलें और पुख्ता सबूत पेश किए। उन्होंने माननीय न्यायालय के सामने गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को इस तरह से प्रस्तुत किया कि आरोपी का बचना नामुमकिन हो गया।दोनों पक्षों की लंबी बहस और गवाहों के बयानों को परखने के बाद, एडीजे-11 घनेंद्र कुमार की अदालत ने सोमवार को अंतिम फैसला सुनाते हुए आरोपी शरीफ को दोषी पाया और उसे 12 साल की सजा के साथ ₹1,00000 (एक लाख रुपये) के जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना न भरने पर आरोपी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
कानून व्यवस्था पर बढ़ा भरोसा इस ऐतिहासिक फैसले और विशेष अभियोजक वैभव अग्रवाल की इस शानदार कानूनी सफलता की कोर्ट परिसर और क्षेत्र में काफी चर्चा है। लोगों का कहना है कि ऐसे कड़े फैसलों से समाज में नशा माफियाओं के हौसले पस्त होंगे और कानून व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत होगा।
