ओडीओपी, ओडीओसी के साथ-साथ कारागार में निरुद्ध बंदियों द्वारा तैयार उत्पादों के भी लगेंगे स्टॉल।

मुरादाबाद ,09 मई 2026 (शनिवार) को राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुरादाबाद सै. माऊज बिन आसिम द्वारा प्रातः 10:00 बजे जिला न्यायालय परिसर में स्थित न्याय भवन से किया जाएगा।सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती तपस्या त्रिपाठी ने बताया कि आज दिनांक 09 मई 2026 (शनिवार) को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में शमनीय वाद, स्टांप वाद, राजस्व वाद, बैंक अकाउंट वसूली वाद, भूमि अधिग्रहण वाद, उपभोक्ता फोरम वाद, वैवाहिक/पारिवारिक वाद, टैक्स संबंधी मामले, विद्युत चोरी वाद, चैक बाउंस से संबंधित धारा 138 एन. आई. एक्ट, चालान से संबंधित समस्त मामले, श्रम वाद, जलकर वाद और प्री-लेटिगेशन के माध्यम से ऐसे वाद जो अभी न्यायालय के समक्ष नहीं आए हैं ऐसे सभी चिन्हित वादों का निस्तारण कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत के अंतर्गत जनपद में करीब 220632 मामले चिन्हित किए गए हैं। इन सभी मामलों से संबंधित विभागीय अधिकारियों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुरूप समाधान सुनिश्चित कराने के संबंध में सक्षम स्तर से निर्देशित किया जा चुका है। जनपद स्तर पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर इस बार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा निर्देशों के अनुरूप एक जनपद-एक उत्पाद, एक जनपद-एक व्यंजन के साथ-साथ कारागार में निरुद्ध बंदियों द्वारा तैयार किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के उत्पादों को भी प्रदर्शित कराया जाएगा। इसके साथ ही कार्यक्रम स्थल पर मेडिकल कैंप भी लगाया जाएगा जिसमें पहुंचकर आमजन स्वास्थ्य परीक्षण करा सकेंगे। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में तहसील न्यायालय से लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्तर तक के किसी भी न्यायालय अथवा विभागीय मामलों को सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित किए जाने हेतु आवेदन पत्र देकर अंतिम आदेश व निर्णय प्राप्त कर सदैव के लिए लंबित मामलों से छुटकारा पाने का बेहतरीन अवसर है। राष्ट्रीय लोक अदालत में विवादों का निस्तारण कराने के अनेक लाभ हैं।दो पक्षों के मध्य आपसी सुलह समझौते के आधार पर विवाद का निस्तारण, पक्षकार व्यक्तिगत स्तर पर स्वयं पहल कर सकता है। लोक अदालत में निस्तारण के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना होता है और लोक अदालत में निर्णय के विरुद्ध किसी भी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती है, इसके साथ-साथ कानूनी जटिलताओं से परे लोक अदालत की प्रक्रिया सहज और आपसी समझौते पर आधारित होती है।
